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कोरोना संक्रमण के साथ सिस्टम भी ले रहा जान

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फरीदाबाद (मूर्ति दलाल)। कोविड से पीड़ित व्यक्ति की मौत से दम तोड़ रहे सिस्टम की हकीकत उजागर हो रही है। लोग अस्पताल के लिए घूम रहे हैं। अस्पताल के दरवाजों पर दम तोड़ रहे हैं। फिर भी सिस्टम को स्वस्थ दिखाने में जुटे अधिकारी गलत सूचनाओं के सहारे सब दुरुस्त दिखाने में लगे हैं। दोषी कोई भी हो गाज लोगों पर गिर रही है। बीते 24 घंटे में जिले आठ लोगों की मौत का आंकड़ा दिखाया गया। इसी दौरान चार ऐसे परिवार सामने आए जिनका सीधा-सीधा आरोप है कि लोग संक्रमण से नहीं इलाज के अभाव में मर रहे हैं। सिस्टम की लाचारी का शिकार हो रहे हैं। इसमें से तीन लोग बीते 24 घंटे में दम तोड़ चुके हैं। एक का बड़ी मुश्किल से घर पर उपचार संभव कराया गया। इसमें ऑक्सीजन व अन्य सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।
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केस-1 : बेटी के सामने पिता की सांसें टूटी
शुक्रवार करीब 12:45 बजे एक बेटी फफक-फफक कर मिनटों में पिता का साथ छूटने का हाल बयां कर चीखने लगी। रोते हुए वह पूरे अस्पताल को बोलने लगी अभी दो मिनट पहले यह मेरे साथ अस्पताल आए। पार्किंग में उतरे अंदर गए तो बता दिया मौत हो गई। कोरोना ऐसे कैसे किसी की जान ले सकता है। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने बताया कि संक्रमित की हालत काफी नाजुक थी। वह संक्रमण के कारण जूझ रहे थे। ऐसे में मरीज को बचाना नामुमकिन हो गया। उधर ऐसे ही हालात कुछ दस मिनट बाद देखने को मिले। यहां इमरजेंसी में मरीज आया तो उसे सांस लेने में समस्या होने लगी। अस्पताल प्रशासन कुछ कर पाता इससे पहले मरीज के साथ आए परिजन ने भागकर अपनी गाड़ी से छोटा सा सिलिंडर लाकर अस्पताल प्रशासन को मुहैया कराया, तब जाकर कहीं मरीजों का जान बचाई जा सकी।
केस-2 : समय पर मिलता इलाज तो न मरता भाई
एनआईटी निवासी बलजीत सिंह का कहना है कि उनके भाई की कोरोना संक्रमण से मौत हो गई। उनका आरोप है कि समय पर जरूरी इलाज के रूप में वेंटिलेटर चाहिए था, वह मिला नहीं। संक्रमण की पुष्टि होते ही उन्होंने भाई को निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। वहां हालत में सुधार नहीं हुआ। वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी। लगातार शरीर की ऑक्सीजन गिर रही थी। शहर के अलग-अलग अस्पतालों में भटकने के बाद भी इलाज के लिए बेड नहीं मिला। उनके भाई का ऑक्सीजन स्तर 32 तक पहुंच गया (सामान्य होने के लिए यह स्तर 95 या अधिक होना चाहिए)। काफी कोशिश के बाद ईएसआई मेडिकल कॉलेज में एक बेड मिला लेकिन रात तक उनके भाई की मौत हो गई।
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केस-3 : जिंदगी बचाने के लिए की कई मिन्नतें
ऐसा ही कुछ सतीश कपूर के साथ बीता। ग्रेटर फरीदाबाद की केएलजे सोसाइटी निवासी सतीश कपूर ने बताया कि वह दोस्त के लिए बेड ढूंढने की कोशिश करते रहे लेकिन कड़ी मशक्कत और सिफारिश के बाद ईएसआईसी अस्पताल में बेड मिला। इस बीच मरीज की हालत इतनी खराब हो गई कि भर्ती होने के घंटे भर में ही उसकी मौत हो गई।
केस-4 : हम वेंटिलेटर ढूंढते रहे, उनकी सांस रुक गई
एनआईटी निवासी अजय अरोड़ा की शुक्रवार को मौत हो गई। परिजन बीते दो दिन से लगातार मीडिया, एसडीएम व अन्य लोगों की मदद से वेंटिलेटर बेड ढूंढने की कवायद करते रहे लेकिन कोई मदद नहीं मिली। इस बीच शुक्रवार को उनकी मौत हो गई। परिजनों से बात करने पर पता चला कि हर मिनट अजय जिंदगी के लिए जूझ रहे थे। परिवार कोशिशें करता रहा लेकिन अजय की जान नहीं बचा सका। उधर एनआईटी निवासी अरुण ने बताया कि उनके परिजन की हालात कोरोना के कारण बेहद खराब हो गई है। बेड ढूंढने के तमाम प्रयास फेल हो गए तो अब घर पर ही इंतजाम कर निजी डॉक्टर के परामर्श पर इलाज कर रहे हैं।
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