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Faridabad News: 2027 में खास होगा सूरजकुंड मेला, पर्यटन विभाग 270 झोपड़ियों को देगा नया रूप

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मौसम और आग के खतरे से मिलेगी सुरक्षा, लाखों पर्यटकों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं
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अमर उजाला ब्यूरो

फरीदाबाद। हर साल देश-दुनिया की लोक संस्कृति, हस्तशिल्प और कला का सबसे बड़ा संगम बनने वाले सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले की तस्वीर अब बदलने जा रही है। हरियाणा पर्यटन निगम लिमिटेड ने मेला परिसर में स्थित 270 झोपड़ियों की पारंपरिक फूस की छतों को हटाकर उनकी जगह आधुनिक यूपीवीसी रूफिंग लगाने का फैसला किया है।
करीब 1.64 करोड़ रुपये की लागत से होने वाली यह परियोजना मेले के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ शिल्पकारों, पर्यटकों और आयोजकों को नया अनुभव देगी। सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला देश के सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल है। वर्ष 1987 में शुरू हुआ यह मेला आज अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल कर चुका है। हर साल फरवरी में आयोजित होने वाले इस मेले में भारत के लगभग सभी राज्यों के अलावा एशिया, यूरोप, अफ्रीका और अन्य देशों के कलाकार एवं शिल्पकार हिस्सा लेते हैं। पिछले कुछ वर्षों में मेले में आने वाले पर्यटकों की संख्या 10 से 15 लाख के बीच रही है। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के राज्यों से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। विदेशी पर्यटक भी भारतीय लोक संस्कृति और हस्तशिल्प को करीब से देखने के लिए सूरजकुंड आते हैं।
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फूस की छतें बन रही थीं चुनौती

मेले की पहचान उसकी ग्रामीण शैली में बनी झोपड़ियों से जुड़ी रही है। इन्हीं झोपड़ियों में देशभर के शिल्पकार अपने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री करते हैं। हालांकि वर्षों से इस्तेमाल हो रही फूस की छतें मौसम की मार और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का कारण बन रही थीं। बारिश, तेज हवाओं और बदलते मौसम में इन छतों को नुकसान पहुंचता था, जिससे हर साल मरम्मत पर खर्च करना पड़ता था। इसके अलावा आग लगने की स्थिति में भी फूस की छतें अधिक संवेदनशील मानी जाती हैं। हजारों लोगों की मौजूदगी वाले आयोजन में सुरक्षा सबसे बड़ा विषय होता है।


मौसम और आग दोनों से होगा बचाव

नई यूपीवीसी रूफिंग लगने के बाद झोपड़ियां पहले की तुलना में अधिक मजबूत और सुरक्षित हो जाएंगी। यह सामग्री पानी, नमी और तेज धूप का बेहतर तरीके से सामना कर सकती है। इससे बारिश के दौरान रिसाव की समस्या कम होगी और तेज हवाओं में भी संरचनाएं अधिक टिकाऊ रहेंगी। सुरक्षा के लिहाज से भी यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फूस की तुलना में यूपीवीसी रूफिंग आग के खतरे को कम करने में मददगार साबित हो सकती है। इससे शिल्पकारों के लाखों रुपये मूल्य के हस्तशिल्प उत्पाद सुरक्षित रहेंगे और पर्यटकों के लिए भी बेहतर वातावरण उपलब्ध होगा।
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स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा

सूरजकुंड मेला केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि फरीदाबाद और पूरे एनसीआर की अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। मेला अवधि के दौरान होटल, रेस्तरां, टैक्सी, ई-रिक्शा, स्थानीय बाजार और पर्यटन से जुड़े हजारों लोगों को रोजगार और आय के अवसर मिलते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सुविधाओं और मजबूत बुनियादी ढांचे से मेले की आकर्षण क्षमता और बढ़ेगी। इससे भविष्य में पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि हो सकती है, जिसका सीधा लाभ स्थानीय कारोबारियों और पर्यटन उद्योग को मिलेगा। सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला हरियाणा की सांस्कृतिक पहचान और भारत की लोक कला का वैश्विक मंच बन चुका है। ऐसे में 270 झोपड़ियों का यह कायाकल्प केवल निर्माण परियोजना नहीं बल्कि देश की सबसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक विरासतों में से एक को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की पहल है। यदि कार्य तय समय पर पूरा हो जाता है तो मेला-2027 में आने वाले लाखों पर्यटकों को सूरजकुंड का अधिक सुरक्षित, आकर्षक और आधुनिक स्वरूप देखने को मिलेगा।
वर्जन


इस बार लोगों को मेले में नया अनुभव देखने को मिलेगा। पर्यटन निगम इसके लिए कई स्तर पर तैयारी कर रहा है। -हरेंद्र, उपमहाप्रबंधक पर्यटन विभाग
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