फरीदाबाद। सूरजकुंड मेले में सैलानियों को 100 साल पुराने हुक्के का भी दीदार होगा। इस हुक्के की कश कभी पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह व पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल तक लगा चुके हैं। फिलहाल इसे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संग्रहालय में संजो कर रखा गया है। इसे मेला परिसर में बनाए जाने वाले हरियाणा के ‘अपना घर’ में लाया जाएगा। यह सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा।
पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह हुक्का करीब 100 साल पुराना है। आजादी के समय भी इसका इस्तेमाल खाप पंचायतों व आजादी की लड़ाई के लिए योजना बनाने के दौरान किया जाता था। आजादी के समय इसे उत्तर प्रदेश, पंजाब व राजस्थान आदि के क्षेत्रों में बैलगाड़ी से गंतव्य तक पहुंचाया जाता था। इसकी ऊंचाई 4.6 व चौड़ाई 1.6 फीट है। यह पीतल, तांबे और लोहे से बना है। इसका वजन 65 किलो है। इसके पेंदे में एक बार में 34 लीटर तक पानी भरा जाता था, जबकि इसके चिलम के भीतर में एक बार में एक किलो से ज्यादा तंबाकू भरा जाता।
ऐसे मिली पहचान
साल 1979 में चौधरी चरण सिंह जब प्रधानमंत्री बने तो दिल्ली में हुई विजयी रैली में देशभर से किसान पहुंचे थे। इन किसानों के बीच यह हुक्का रखा गया था, जिसका चरण सिंह ने कश लगाया था। ठीक इसी तरह हरियाणा के किसानों की दूसरी विजयी रैली साल 1990 में देवीलाल के उप-प्रधानमंत्री बनने पर दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में हुई थी। उस वक्त भी ये हुक्का वहां था। यही नहीं दिल्ली, हरियाणा, यूपी और राजस्थान में जब-जब खापों की बड़ी पंचायतें हुईं हैं, यह हुक्का वहां फैसलों का गवाह बना।
‘अपना घर’ बनेगा सेल्फी प्वाइंट
35वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले में ‘अपना घर’ सैलानियों के लिए सेल्फी प्वाइंट बनेगा। मेला प्रबंधक के अनुसार यहां हरियाणवी पगड़ी सभी के लिए आकर्षण का केंद्र होगी। बच्चे, युवा से लेकर हर उम्र के लोग इसको पहनना पसंद करेंगे। साथ ही फोटो खिंचवाते नजर आएंगे। अधिकारियों ने बताया कि इस बार मेले में सैलानियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। 19 मार्च से चार अप्रैल के बीच 10 लाख से अधिक सैलानियों के पहुंचने की संभावना है।
मेले में इस बार भी सैलानियों को काफी कुछ देखने को मिलेगा। 100 साल पुराने हुक्के के साथ हरियाणवी पगड़ी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र होगी। मेले की तैयारी जोरों से की जा रही है।
- राजेश जून, नोडल अधिकारी, सूरजकुंड मेला