घाटे में चल रहे सब डिवीजनों पर सरकार का ध्यान नहीं है, लेकिन जिन सब डिवीजनों से सरकार को कोई नुकसान नहीं हो रहा है उन्हें निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है। सब डिवीजनों के निजीकरण के विरोध में कर्मचारी यूनियन लामबंद हो गई हैं। कर्मचारियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।
हाल ही में दक्षिण हरियाणा विद्युत वितरण निगम ने फरीदाबाद की ओल्ड डिवीजन की चार सब डिवीजनों को निजी हाथों में देने का फैसला किया है।
ओल्ड डिवीजन के ईस्ट सब डिवीजन, वेस्ट सब डिवीजन, मथुरा रोड सब डिवीजन और चार नंबर सब डिवीजन के निजीकरण की तैयारी है। इस पूरी डिवीजन का लाइनलॉस महज 15 प्रतिशत है, जबकि बिल वसूली के मामले में इस डिवीजन की स्थिति ठीक है।
डिवीजन की वसूली करीब 95 प्रतिशत है। ग्रेटर फरीदाबाद डिवीजन के तहत आने वाले चारों सब डिवीजन में लाइनलॉस 30 से 50 प्रतिशत हैं, वसूली के मामले में भी ये फिसड्डी हैं।
निगम के इस निर्णय से स्पष्ट है कि निजीकरण के मामले में कोई पैमाना नहीं है। हरियाणा सर्व कर्मचारी संघ के महासचिव सुभाष लांबा का कहना है कि एक ही डिवीजन की चार सब डिवीजनों को निजी हाथों में देने की क्या जरूरत है।
जो सब डिवीजन पहले ही घाटे में चल रहे हैं और लाइनलॉस भी ज्यादा, ऐसे सब डिवीजनों की हालत सुधारने के लिए कोई योजना नहीं है। ऐसे तो और भ्रष्टाचार होगा और निगम और घाटे में जाएगा।
ग्रेटर फरीदाबाद में सबसे ज्यादा लाइन लॉस
बिजली निगम के रिकॉर्ड के अनुसर वर्ष 2015-16 में ग्रेटर फरीदाबाद डिवीजन में सबसे ज्यादा लाइन लॉस है। अधिकारियों के मुताबिक ग्रेटर फरीदाबाद डिवीजन में 38.3 प्रतिशत लाइन लॉस है।
यहां से न तो इस लाइन लॉस की रिकवरी की जाती है और न ही समय पर लोगों बिल भरते है। इसके बाद भी ग्रेटर फरीदाबाद डिवीजन को निजी हाथों में नहीं दिया जा रहा है।
ऐसे तो और बढ़ेगा भ्रष्टाचार
कर्मचारी यूनियनों ने आरोप लगाया है कि ऐसे तो बिजली निगम में और भ्रष्टाचार बढ़ेगा। फायदा वाले सब डिवीजनों को निजी हाथों में देने से निजी कंपनी वाले मनमानी करेंगे और उपभोक्ताओं को परेशानी होंगी।
डिवीजन वाइज आंकड़े
ओल्ड डिवीजन (एवरेज लाइन लॉस- 14.91 प्रतिशत) वसूली (94.50)
1- ईस्ट सब डिवीजन लाइन लॉस (15.10) वसूली (95.24)
2- वेस्ट सब डिवीजन लाइन लॉस (18.18) वसूली (96.77)
3-मथुरा रोड सब डिवीजन लाइन लॉस (8.14) वसूली (95.68)
4- नंबर चार सब डिवीजन लाइन लॉस (22.48) वसूली (89.62)
ग्रेटर फरीदाबाद (एवरेज लाइन लॉस 38.3 प्रतिशत) वसूली (89.43)
1- खेड़ी कलां सब डिवीजन लाइन लॉस (30.02) वसूली (96.31)
2- तिलपत सब डिवीजन लाइन लॉस (37.93) वसूली (74.24)
3-बदौला सब डिवीजन लाइन लॉस (49.52) वसूली (90.01)
4- छायसां सब डिवीजन लाइन लॉस (35.32) वसूली (95.09)
नोट (ये आंकड़े साल 2015-16 के आधार पर हैं)