अधिकतर बस स्टॉप हो चुके हैं बदहाल, अतिक्रमण और अवैध पार्किंग ने बढ़ाई परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। एक ओर सरकार सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर फरीदाबाद शहर में बने अधिकतर बस स्टॉप खुद अपनी बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं। बीके चौक, बाटा चौक, मस्जिद मोड़, मेट्रो मॉल एनआईटी, अजरौंदा और ओल्ड फरीदाबाद समेत दर्जनों बस स्टॉप की स्थिति इतनी खराब है कि वहां रुकना भी खतरे से खाली नहीं। कुछ बस स्टॉप पर कूड़े के ढेर हैं तो कहीं अतिक्रमण और अवैध पार्किंग ने इन्हें पूरी तरह से घेर रखा है।
एक तरफ कई करोड़ की लागत से एनआईटी के मॉल की तरह बस स्टैंड बनाया गया है। वहीं दूसरी ओर बस स्टॉप की हालत खराब पड़ी है। कुछ बस स्टॉप के सामने अवैध रूप से वाहन खड़े रहते हैं तो कुछ के पास कूड़ा पड़ा है। लोगों को इन बस स्टॉप का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। तेज धूप में बसों का इंतजार करने वाले लोगों को पेड़ व अन्य निर्माणों का सहारा लेकर काम चलाना पड़ रहा है।
बीके चौक का यात्री शेड बन चुका है खतरा
बीके चौक पर बना यात्री शेड अब खस्ताहाल हो चुका है। शेड का लोहा पूरी तरह गल चुका है और उस पर जंग लग चुकी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक यह शेड किसी भी वक्त गिर सकता है। बावजूद इसके न प्रशासन और न ही परिवहन विभाग ने अब तक कोई सुध ली है। बरसात के मौसम में यह खतरा और भी अधिक हो जाता है क्योंकि जर्जर छत कभी भी ढह सकती है।
बाटा चौक बस स्टॉप बना डंपिंग पॉइंट
बाटा चौक मेट्रो स्टेशन के पास स्थित बस स्टॉप कूड़े का डंपिंग पॉइंट बन चुका है। यहां ना कोई साफ-सफाई है और ना ही यात्रियों के बैठने की कोई व्यवस्था। कई बार स्थानीय दुकानदार यहां कचरा डाल देते हैं और कोई रोकने वाला नहीं होता। इसके कारण यात्री मजबूरी में धूप, बारिश और गंदगी के बीच बस का इंतजार करते हैं
मेट्रो मॉल एनआईटी, मस्जिद मोड़ और अजरौंदा पर अतिक्रमण
मेट्रो मॉल एनआईटी, मस्जिद मोड़ (गुरुग्राम रोड) और अजरौंदा चौक के पास बने बस स्टॉप अतिक्रमण का शिकार हो चुके हैं। ठेले, रेहड़ी, अस्थायी दुकानें और वाहन यहां हर वक्त खड़े रहते हैं। इससे बसों के लिए रुकना मुश्किल हो जाता है और यात्रियों को बीच सड़क पर चढ़ना-उतरना पड़ता है। इससे दुर्घटना की संभावना बनी रहती है।
ओल्ड फरीदाबाद के बस स्टॉप पर बेंच हुई जर्जर
ओल्ड फरीदाबाद के बस स्टॉप पर बेंच मौजूद तो हैं, लेकिन उनकी ऊंचाई इतनी कम हो गई है कि बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे आराम से बैठ नहीं पाते। ये बेंच वर्षों से रिपेयर नहीं हुई हैं और अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। स्थानीय निवासी कई बार अधिकारियों को शिकायत दे चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अवैध पार्किंग बनी सबसे बड़ी बाधा
शहर के अधिकतर बस स्टॉप पर निजी वाहन चालकों ने अवैध रूप से अपने दोपहिया और चारपहिया वाहन पार्क कर रखे हैं। इससे बसों को रुकने की जगह नहीं मिलती। यात्री भी असमंजस में रहते हैं कि बस आखिर रुकेगी कहां। ये अव्यवस्था न केवल यात्री सुविधाओं को प्रभावित कर रही है, बल्कि ट्रैफिक जाम की वजह भी बन रही है।
रोजाना सफर करने वाले लोगों को नहीं मिल रही कोई सुविधा
इन सभी समस्याओं के बावजूद एफएमडीए, परिवहन विभाग और पुलिस-प्रशासन की ओर से कोई संयुक्त पहल नहीं की गई है। बस स्टैंडों की मरम्मत, सफाई, अतिक्रमण हटाने और सुरक्षित यात्री सुविधा जैसी मूलभूत जिम्मेदारियों को लेकर विभागों में आपसी समन्वय की कमी दिखाई देती है।
बस स्टॉप के ऑडिट की उठी मांग
स्थानीय निवासी और सामाजिक संगठनों की मांग है कि शहर के सभी बस स्टॉप का तकनीकी ऑडिट हो और उनकी हालत के अनुसार मरम्मत या पुनर्निर्माण कराया जाए। इसके अलावा हर बस स्टॉप पर नियमित सफाई, सीसीटीवी कैमरे और पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था की जाए ताकि यात्रियों को सुरक्षा और सुविधा मिल सके।
वर्जन
इस मामले को लेकर जब बस डिपो की जनरल मैनेजर शिखा अंतिल से बात करने का प्रयास किया गया तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया। परिवहन विभाग के अन्य अधिकारियों का कहना है कि बस स्टॉप की देखरेख कई स्थानों पर एफएमडीए व कई स्थानों पर हाईवे अथॉरिटी की तरफ से की जाती है।