फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Faridabad News: आगे बढ़ने की होड़ में बिछड़ रहे जीवनसाथी

विज्ञापन
विज्ञापन
फोटो-
विज्ञापन


2019 से अबतक 8840 तलाक के मामलों की हुई सुनवाई, 2941 अभी भी लंबित
धीरज गिरी

फरीदाबाद। जिला अदालत फरीदाबाद में तलाक के बढ़ते मामले आज के इस भाग-दौड़ और तकनीकी जीवन की पोल खोलते हैं, जहां लोग रिश्तों से ज्यादा काम, पदोन्नति, पैसा और विलासिता में खोते जा रहे हैं और अपनी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को भूलते जा रहे हैं। काम की व्यस्तता ने लोगों को परिवार से तो दूर किया ही है, बल्कि खुद के बारे में भी लापरवाह बनाया है। पति-पत्नी दोनों के पास समय और बातचीत की कमी तलाक में बदलती जा रही है, जो परिवार और समाज दोनों के लिए काफी चिंता का विषय है।
राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (एनजेडीजी) से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 से अब तक फरीदाबाद के पारिवारिक न्यायालय में 8840 तलाक के मामलों की सुनवाई हुई है, जिसमें 2023 में 2352 मामले विवाह विच्छेद से जुड़े थे। वरिष्ठ अधिवक्ता शिवदत्त वशिष्ठ का कहना है कि पहले के समय में विवाह के दौरान परिवार का आचरण और संस्कार देखकर ही शादी के लिए हामी भरी जाती थी। प्रेम विवाह में यह सब खत्म हो गया है। यही कारण है कि प्रेम विवाह में तलाक के मामले बढ़े हैं। उनका कहना है कि आज लड़का व लड़की दोनों के तरफ से लगभग बराबर तलाक के मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। अधिवक्ता मनीष भुलन बताते है कि में पति व पत्नी में आपसी मतभेद, ज्यादा कमाने की होड़, गलतफहमी, एक-दूसरे से दूर रह कर नौकरी करना, घरेलू हिंसा आज के वक्त में मुख्य रूप से तलाक के कारण बनते जा रहे हैं। पिछले 10 वर्षों में जिला अदालत फरीदाबाद में 14586 विवाह विच्छेद के मामलों में सुनवाई हुई है, वहीं 2941 मामले अभी लंबित पड़े हैं। पूरे भारत में इस समय 6 लाख से ज्यादा तलाक के मामले लंबित हैं, वहीं पिछले 5 वर्षों में करीब 17 लाख मामलों की सुनवाई हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन




-

जल्दबाजी में ना लें निर्णय


ऐसे मामलों में लड़का और लड़की दोनों पक्षों को समझाया जाए, गलत चीजों का समर्थन ना करें, पति व पत्नी दोनों अपनी कमियों को दूर करें और जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचेंगे तो परिवार को टूटने से बचाया जा सकता है। न्यायालय में तलाक के मामलों को सुलझाने के लिए मध्यस्थ (मीडिएटर) होता है, जो पति-पत्नी के बीच संवाद की मदद से समझौता कराने की कोशिश करता है। - शिवदत्त वशिष्ठ, वरिष्ठ अधिवक्ता, बार काउंसिल पंजाब एवं हरियाणा के पूर्व मनोनीत सदस्य
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें