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Faridabad News: रिहायशी इलाकों में दुकानें-पीजी, आवासीय कॉलोनियों का बदल रहा स्वरूप

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दिल्ली के पीजी हादसे के बाद फरीदाबाद में भी ऐसे भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं, स्थानीय प्रशासन आंखें मूंदे बैठा
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अमर उजाला ब्यूरो

फरीदाबाद। रिहायशी इलाकों में घरों के भीतर दुकान-ऑफिस और पीजी चलने से शहर की आवासीय कॉलोनियों का स्वरूप दिन प्रतिदिन बदल रहा है। सेक्टर-7-10, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, सेक्टर-9-10 डिवाइडिंग रोड और एनआईटी के कई इलाकों में बढ़ी आवाजाही और वाहनों के दबाव से पार्किंग, पानी, सीवर व बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं पर असर पड़ रहा है। दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी हादसे के बाद फरीदाबाद में भी ऐसे भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।

स्मार्ट सिटी के एनआईटी-1, 2, 3, 5, सेक्टर-7/10 हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रिहायशी मकानों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। घरों में दुकान या ऑफिस चलने से दिनभर लोगों और वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। इससे स्थानीय निवासियों को पार्किंग की समस्या का सामना करना पड़ता है। कई जगह मकान का उपयोग उसके मूल रिहायशी उद्देश्य से अलग होने के कारण आसपास के लोगों की परेशानी बढ़ गई है। इसके अलावा भी शहर की विभिन्न कॉलोनियों में व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं।
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पीजी से भी बढ़ रही आवाजाही

एनआईटी-3, एनआईटी-5 और सेक्टर-11, सेक्टर-16, सेक्टर-31, सेक्टर-37 आदि इलाकों में पीजी संचालित हो रहे हैं। ग्रेटर फरीदाबाद में भी पीजी चल रहे हैं। पीजी में रहने वाले लोगों की लगातार आवाजाही से रिहायशी इलाकों का स्वरूप बदल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिक संख्या में लोगों के रहने से पानी, सीवर, कूड़ा उठान और पार्किंग जैसी सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसके साथ ही पीजी संचालक एक कमरे में कई लोगों को रखते हैं। इससे रिहायशी इलाकों में लोगों की आवाजाही बढ़ने के साथ रात तक शोर-शराबा बना रहता है। इसके कारण आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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सोसाइटियों में चल रहे ब्यूटी पार्लर और कोचिंग सेंटर
ग्रेटर फरीदाबाद की विभिन्न सोसाइटियों के साथ सेक्टर-11 में भी कई स्थानों पर रिहायशी भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही है। सोसाइटी के भीतर घरों और कमरों में ब्यूटी पार्लर, ट्यूशन और कोचिंग सेंटर चलाए जा रहे हैं। इससे सोसाइटी में रहने वाले अन्य लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों के आने-जाने और वाहनों की संख्या बढ़ने से पार्किंग की समस्या भी पैदा हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे रिहायशी इलाकों का माहौल प्रभावित हो रहा है और मूलभूत सुविधाओं पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
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