श्रम विभाग द्वारा संचालित कैंटीन ने महिलाओं को समाज में आत्मसम्मान दिलाया, अब आत्मनिर्भर बनकर संवार रहीं परिवार का भविष्य
550 लोगों के लिए भोजन तैयार करती हैं प्रतिदिन
राहुल राज
फरीदाबाद। कभी घर की चहादीवारी तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। श्रम विभाग द्वारा संचालित कैंटीन ने महिलाओं को समाज में आत्मसम्मान दिलाया है। सूर्यांश सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी महिलाएं अपनी मेहनत और हुनर के दम पर अपने परिवार का सहारा बनी हैं। इसके साथ ही अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। गौरतलब है कि श्रम विभाग अपनी कैंटीनों के संचालन की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह (सेल्फ हेल्प ग्रुप) से जुड़ी महिलाओं को ही देता है। महिलाओं का कहना है कि समूह से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है।
समूह की महिलाएं मिलकर प्रतिदिन करीब 550 लोगों के लिए भोजन तैयार करती हैं। इस भोजन की आपूर्ति छह अलग-अलग स्थानों पर ई-रिक्शा के माध्यम से की जाती है। पूरे कार्य का मासिक बिल करीब साढ़े तीन लाख रुपये तक बनता है। रसोई में भोजन तैयार करने से लेकर पैकिंग और समय पर आपूर्ति तक की पूरी जिम्मेदारी महिलाएं ही संभालती हैं।
रोजगार ने समाज में दिलाई नई पहचान
महिलाओं का कहना है कि स्वयं सहायता समूह ने उन्हें सिर्फ रोजगार नहीं दिया, बल्कि आत्मविश्वास, सम्मान और समाज में नई पहचान भी दिलाई है। आज वे अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बनने के साथ-साथ अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं। उनका मानना है कि यदि इस तरह के स्वयं सहायता समूहों को और बढ़ावा दिया जाए तो हजारों महिलाओं की जिंदगी बदल सकती है।
बच्चों की पढ़ाई में हुआ है सुधार
कैंटीन से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि पहले उनके बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते थे। अब नियमित आमदनी के कारण निजी स्कूलों में शिक्षा आसानी से ले रहे हैं। कई महिलाओं ने अपनी मेहनत की कमाई से अपना घर भी बना लिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि अब उन्हें किसी के सामने आर्थिक मदद के लिए हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ती है।
महिलाओं से बातचीत
पांच साल पहले मैं गृहिणी थी। घर की जरूरतों के लिए परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्भर थी। रोजगार मिलने के बाद परिवार के साथ अपने सपनों को भी साकार कर रही हूं।
- ममता
रोजगार मिलने के बाद बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च आसानी से चल रहा है। सबसे बड़ी खुशी यह है कि अब हम आत्मनिर्भर बनकर सम्मान के साथ जीवन जी रहे हैं।
- करमजीत
कैंटीन ने सिर्फ रोजगार नहीं दिया है बल्कि आत्मविश्वास भी दिया है। आज हम अपने पैरों पर खड़े हैं और परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने में बराबरी से योगदान दे रहे हैं।
- निर्मला
कैंटीन से मिलने वाले पैसों से मैंने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए ऑनलाइन कोर्स खरीदा है। इसके बाद बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता में इजाफा हुआ है। कैंटीन ने समाज में सम्मान दिलाया है।
- शारदा