सांस लेने में तकलीफ, खांसी और सीने में जकड़न की शिकायत
चिकित्सकों ने मास्क लगाने और सावधानी बरतने की दी सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण का असर लोगों की सेहत पर पड़ने लगा है। खासकर अस्थमा से पीड़ित मरीजों को सांस लेने में अधिक परेशानी हो रही है। बीके नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन करीब 40 मरीज सांस संबंधी समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार, हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक तत्व सांस की नलियों में जलन पैदा कर सकते हैं, जिससे अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है।
बीके अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. योगेश गुप्ता ने बताया कि प्रदूषण के कारण लोगों को सांस संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अस्थमा के मरीजों को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से उनकी खांसी बढ़ सकती है और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। ऐसे मरीजों को अपनी दवाएं नियमित रूप से लेने और चिकित्सक की सलाह का पालन करने की जरूरत है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों को प्रदूषण के दौरान विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। समय पर सावधानी और उपचार से अस्थमा के गंभीर दौरे के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
ये लक्षण दिखें तो रहें सतर्क
अस्थमा के मरीजों में सांस फूलना, लगातार खांसी आना, सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज निकलना और सीने में जकड़न इसके प्रमुख लक्षण हैं। प्रदूषण बढ़ने पर ये लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं। यदि सांस लेने में बहुत ज्यादा परेशानी हो या निर्धारित दवा से राहत न मिले तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
बचाव के लिए बरतें ये सावधानियां
प्रदूषण अधिक होने पर सुबह-शाम बाहर निकलने और खुले में व्यायाम करने से बचें
धूल, धुएं, अगरबत्ती और सिगरेट के धुएं से दूर रहें
डॉक्टर की सलाह के अनुसार इनहेलर और अन्य दवाएं नियमित लें, इनहेलर अपने पास रखें
घर में धूल जमा न होने दें और पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखें
बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं बंद न करें
स्थान एक्यूआई
बल्लभगढ़ 175
फरीदाबाद 109
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5 मशीनें हैं जिले में प्रदूषण का स्तर मापने के लिए। इनमें से फरीदाबाद की दो मशीनें बंद हैं