फरीदाबाद। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद खोरी गांव में तोड़फोड़ कार्रवाई के करीब डेढ़ माह बाद नगर निगम ने मलबा उठाने के लिए निजी एजेंसी को काम सौंपा है। एक सप्ताह में यह एजेंसी मलबा उठाएगी। मलबे का निस्तारण सिही गांव के पास निगम की खाली जमीन पर किया जाएगा। इस दौरान ट्रांसपोर्ट पर आने वाले खर्च का वहन निगम करेगा।
सुप्रीम कोर्ट सात जून को सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार और स्थानीय प्रशासन को अरावली में बसे खोरी गांव के 150 एकड़ जमीन पर को पूरी तरह खाली कर जंगल की जमीन को फिर से जंगल बनाने के आदेश दिए थे। इस आदेश की पालना करते हुए नगर निगम और वन विभाग ने 22 दिन तक तोड़फोड़ अभियान चलाया। इस दौरान निगम की टीम ने करीब 10 हजार मकानों को ध्वस्त किया। इसके बाद एक महीने तक वहां के लोगों को मौका दिया गया था कि मलबा ले जाना चाहे तो ले जा सकते हैं। इसके लिए निगम द्वारा लोगों को ठेकेदार और कबाड़ी भी उपलब्ध कराए गए। काफी लोगों ने अपना मलबा मौके पर ही ठेकेदारों को बेच दिया। लेकिन, अभी भी 100 टन से ज्यादा मलबा खोरी वन क्षेत्र में पड़ा हुआ है।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने खोरी मामले में हुई सुनवाई के दौरान नगर निगम से पूछा कि खोरी में मलबा हटाकर वन विकसित करने की कार्रवाई शुरू हुई है या नहीं, इसकी रिपोर्ट 27 सितंबर को सौंपी जाए। इस आदेश को लेकर इंजीनियरिंग ब्रांच ने तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। नगर निगम इंजीनियरिंग ब्रांच ने एक निजी एजेंसी को खोरी का मलबा उठाने का काम सौंपा है। ये एजेंसी सात दिनों में अपने वाहन लगा कर मलबा उठाएगी। इन वाहनों में जीपीएस लगे होंगे। वाहन से मलबा ले जाने का टिपिंग चार्ज नगर निगम देगा। ये एजेंसी मलबा उठा कर प्लांट तक ले जाएगी जहां इस मलबे से टाइल व ईंटें बनाई जाएगी।
वर्जन
खोरी गांव में मलबा ले जाने के लिए लोगों को समय दिया गया था। वह अवधि अब समाप्त हो चुकी है। निगम ने मलबा उठाने के लिए एक निजी एजेंसी को नियुक्त किया है। जो मलबा उठाने का काम करेगी। - यशपाल यादव, निगमायुक्त