फरीदाबाद। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ह्दय रोगियों के रोज 15 ऑपरेशन करने की तैयारी है। अभी रोजाना आठ की एंजियोप्लास्टी की जाती है जिससे अन्य मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। इस दौरान सबसे ज्यादा परेशानी दूसरे राज्यों से आने वाले मरीजों को उठानी पड़ती है जिसे देखते हुए अस्पताल प्रबंधन द्वारा यह फैसला लिया गया है।
जिले के 6.5 लाख कार्ड धारक है। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की ओर से मरीजों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। पिछले दिनों अस्पताल में दिल की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के बेहतर इलाज के लिए विश्वस्तरीय कैथ लैब (हार्ट सेंटर) की शुरुआत की गई है। यहां रोजाना करीब आठ मरीजों के ऑपरेशन व एंजियोप्लास्टी की जाती है, लेकिन ह्दय रोगियों की संख्या काफी ज्यादा है। कैथलैब शुरू होने के बाद ह्दय रोगियों का निजी अस्पतालों में रेफरल भी बंद कर दिया गया। जिससे मरीजों को एंजियोग्राफी व एंजियोप्लास्टी कराने के लिए दो से तीन माह का इंतजार करना पड़ता है। ओपीडी में दिनभर मरीजों की भारी भीड़ रहती है। इसे देखते हुए कॉलेत प्रबंधन ने अस्पताल में आठ ह्दय रोग विशेषज्ञों की तैनाती की है। जिससे इलाज के लिए आने वाले मरीजों ज्यादा इंताजार न करना पड़े। उन्हें 24 घंटे सुविधा मिल सके।
3000 दिल के रोगियों का होता है इलाज
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में हर महीने औसतन करीब 600 ह्दय रोगी इलाज के लिए पहुंचते हैं। नागरिक अस्पताल बीके हार्ट सेंटर में करीब 500 से 700 और निजी अस्पतालों में करीब 1200 मरीज पहुंचते हैं। ईएसआईसी में कैथ लैब शुरू होने के बाद निजी अस्पतालों में रेफरल लगभग बंद कर दिया गया है। निजी अस्पतालों में एक मरीज की एंजियोप्लास्टी (स्टंट डालना) पर एक से डेढ़ लाख रुपये का खर्च आता है।
कैथलैब में ये मिल रही सुविधाएं
अस्पताल में ह्दय रोगियों को एंजियोप्लास्टी और एंजियोग्राफी, हृदय की पूरी जांच, स्टंट व पेस मेकर आदि डाले जाते हैं।
रोजाना 15 एजियोप्लास्टी होने से मरीजों की वेटिंग होगी कम
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में फरीदाबाद समेत गुरुग्राम, पलवल होडल, हथीन, रेवाड़ी, सोनीपत, पानीपत आदि जिलों में इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें ह्दय रोग से जूझ रहे मरीजों की संख्या भी काफी होती है। इससे एंजियोप्लास्टी के मरीजों को काफी इंतजार करना पड़ता है। इस कारण दूर-दराज से आने वाले मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। जिससे कई मरीज निजी अस्पतालों में निजी खर्च पर इलाज करवाने को मजबूर है।
अभी रोज आठ मरीजों की एंजियोप्लास्टी की जा रही है। इन्हें बढ़ाकर 15 करने की योजना है।
- प्रो. डॉ. अनिल पांडे, रजिस्ट्रार, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल