वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को करना पड़ता है परेशानी का सामना
संवाद न्यूज एजेंसी
छांयसा। हीरापुर से मोहना जाने वाला मुख्य मार्ग इस समय ग्रामीणों के लिए जान जोखिम में डालने वाला रास्ता बन चुका है। लगभग 500 मीटर तक फैला जलभराव और टूट चुकी सड़क वाहन चालकों और पैदल यात्रियों के लिए लगातार परेशानी पैदा कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है। गांव के ही कुछ लोगों द्वारा घरों का पानी सड़क पर छोड़े जाने से यह मार्ग हर मौसम में जलमग्न रहता है, जिससे सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं।
पीडब्ल्यूडी ने कुछ समय पहले इस मार्ग पर नाला बनाने की कवायद शुरू की थी ताकि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान हो सके। नाला न बनने से पानी अब भी सड़क पर ही जमा हो रहा है और विभागीय धन भी वापस लौट गया। इस लापरवाही की कीमत आज ग्रामीणों को टूटी सड़क और बढ़ते हादसों के रूप में चुकानी पड़ रही है।
गांव के सरपंच प्रतिनिधि कमल कौशिक का कहना है कि बाहर रहने वाले कुछ लोग अपने घरों का गंदा पानी सीधे सड़क पर छोड़ देते हैं। इससे सड़क साल भर पानी में डूबी रहती है और पूरी तरह टूट चुकी है। कई जगह गहरे गड्ढे हो चुके हैं, जिनका अंदाजा चलते समय लगाना मुश्किल होता है। यही वजह है कि दोपहिया और चौपहिया वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाएं आए दिन सामने आती रहती हैं।
ग्रामीण सुंदर कौशिक ने बताया कि इस मार्ग पर हमेशा पानी भरा रहता है और उसमें छिपे गड्ढों के कारण बाइक सवार अक्सर फिसल जाते हैं। कई लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि आज विभाग ने सड़क के गड्ढे भरने के लिए पहले जेसीबी से सड़क को ही तोड़ दिया। हमने पहली बार देखा कि पीडब्ल्यूडी गड्ढे भरने के लिए सड़क को ही उखाड़ देता है। इससे सड़क और ज्यादा खराब हो गई है और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने विभाग की इस कार्यशैली को बेहद गैरजिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि यदि समय रहते नाला निर्माण पूरा कर दिया जाता तो आज सड़क की यह हालत नहीं होती। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द स्थायी नाला बनाया जाए, टूटी सड़क का पुनर्निर्माण किया जाए और पानी छोड़ने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई हो।