स्वास्थ्य विभाग ने पीडब्ल्यूडी से सिविल और इलेक्ट्रिकल कार्यों का विस्तृत बजट मांगा
नीरज धर पाण्डेय
फरीदाबाद। जिले में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए बीके सिविल अस्पताल समेत पाली, तिगांव, कराली और खोरी सीएचसी में ट्रॉमा सेंटर विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है, लेकिन प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में ही है। स्वास्थ्य विभाग ने पीडब्ल्यूडी से सिविल और इलेक्ट्रिकल कार्यों का विस्तृत बजट मांगा है। बजट रिपोर्ट और मुख्यालय से मंजूरी मिलने के बाद ही प्रोजेक्ट पर आगे काम शुरू हो सकेगा। ऐसे में ट्रॉमा सेंटर शुरू होने में अभी समय लग सकता है, जबकि जिले में इसकी जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।
प्रक्रिया में हो रही देरी, मंजूरी का इंतजार
स्वास्थ्य विभाग की ओर से ट्रॉमा सेंटर विकसित करने की पहल की गई है, लेकिन फिलहाल पूरा प्रोजेक्ट बजट प्रस्ताव और प्रशासनिक मंजूरी पर निर्भर है। पीडब्ल्यूडी से रिपोर्ट मिलने के बाद ही प्रस्ताव मुख्यालय भेजा जाएगा। इसके बाद वित्तीय स्वीकृति मिलने पर निर्माण और अपग्रेडेशन का कार्य शुरू होगा। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया जारी है, लेकिन अभी किसी समयसीमा का निर्धारण नहीं किया गया है।
लगातार रेफर हो रहे गंभीर घायल
जिला नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन सड़क दुर्घटनाओं और अन्य हादसों में घायल मरीज पहुंचते हैं। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायलों को दिल्ली या अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। हाल ही में मुजेसर स्थित इस्पात फैक्टरी में आग लगने की घटना में भी कई गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को एम्स और सफदरजंग अस्पताल भेजा गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जिले में आधुनिक ट्रॉमा सेंटर की सुविधा होती तो कई मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर उपचार मिल सकता था।
गोल्डन आवर में इलाज की कमी पड़ रही भारी
दुर्घटना के बाद का पहला घंटा यानी गोल्डन आवर मरीज की जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन ट्रॉमा सेंटर और विशेषज्ञ सुविधाओं के अभाव में कई मरीजों को रेफर करने में ही काफी समय लग जाता है। इससे गंभीर मरीजों की स्थिति और बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी
पाली, तिगांव, कराली और खोरी जैसे क्षेत्रों में दुर्घटना होने पर मरीजों को पहले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र और फिर शहर या दिल्ली के बड़े अस्पतालों तक पहुंचना पड़ता है। इससे उपचार में देरी होती है। प्रस्तावित ट्रॉमा सेंटर शुरू होने के बाद इन क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
लंबे समय से उठ रही ट्रॉमा सेंटर की मांग
करीब 25 लाख आबादी वाले शहर में वर्षों से ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने और जिला नागरिक अस्पताल को रेफरल मुक्त बनाने की मांग उठती रही है। सामाजिक संगठनों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि जिले में बढ़ती आबादी, औद्योगिक इकाइयों और सड़क दुर्घटनाओं के मामलों को देखते हुए आधुनिक ट्रॉमा सुविधाएं समय की जरूरत बन चुकी हैं।
ट्रॉमा सेंटर परियोजना के लिए पीडब्ल्यूडी से बजट रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने पर चयनित स्वास्थ्य केंद्रों में चरणबद्ध तरीके से सुविधाएं विकसित की जाएंगी।-डॉ. एमपी सिंह, डिप्टी सिविल सर्जन