फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Faridabad News: बीके अस्पताल में हड़ताल से मरीज बेहाल, ऑपरेशन ठप

विज्ञापन
विज्ञापन
मरीजों को किया जा रहा रेफर, कई मरीजों को लंबे इंतजार के बाद भी सीमित चिकित्सा सुविधा मिल पा रही है
विज्ञापन

नीरज धर पाण्डेय

फरीदाबाद। बीके नागरिक अस्पताल में एचसीएमएस डॉक्टरों की हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो गई हैं। जिले में एचसीएमएसए के कुल 141 डॉक्टरों में से 36 डॉक्टर हड़ताल पर हैं, जिनमें बीके अस्पताल के 8 डॉक्टर शामिल हैं। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। ओपीडी से लेकर ऑपरेशन थिएटर तक कामकाज लगभग रुका हुआ है।

अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारु रूप से संचालन के लिए अटल बिहारी बाजपेयी मेडिकल कॉलेज से 40, ईएसआई से 18 और अमृता अस्पताल से कुल 5 डॉक्टरों को बुलाया गया है।
विज्ञापन



हड़ताल के कारण मरीज लौट रहे वापस

बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) सहित अस्पताल के अन्य विभागों में हड़ताल का स्पष्ट असर देखा जा रहा है। ओपीडी में दिखाने आए बड़ी संख्या में मरीज लौटने को मजबूर हो रहे हैं। सामान्य दिनों में जहां प्रतिदिन 2000 से 2500 मरीज अस्पताल पहुंचते थे, वहीं हड़ताल के कारण यह संख्या घटकर 1000 से 1500 रह गई है। डॉक्टरों की कमी के चलते कई मरीजों को वापस लौटना पड़ रहा है। कई मरीजों को लंबे इंतजार के बाद भी सीमित चिकित्सा सुविधा मिल पा रही है।

दो दिनों में छह मरीज रेफर

अस्पताल प्रशासन ने अनुसार दो दिनों में कुल छह मरीजों को रेफर करना पड़ा है। मंगलवार को पांच और बुधवार को एक मरीज को गंभीर स्थिति में अन्य अस्पतालों में भेजा गया। जानकारी के मुताबिक रेफर किए गए मरीजों का आंकड़ा कहीं ज्यादा है। आपातकालीन सेवाएं चल रही हैं, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण गंभीर मामलों का उपचार जोखिम में है।


ऑपरेशन थिएटर में सन्नाटा, एक भी सर्जरी नहीं

हड़ताल के दौरान पिछले दो दिनों में अस्पताल में एक भी ऑपरेशन नहीं हुआ है। सर्जरी विभाग के रुक जाने से मरीजों की परेशानी और बढ़ गई है। कई मरीजों की तय तारीख वाली सर्जरी भी अनिश्चितकाल के लिए टाल दी गई है।


विभागीय कार्य पूरी तरह बंद

अस्पताल के विभिन्न विभागों में भी कामकाज ठप है। जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी नहीं हो रहे हैं, विभागीय फाइलें अटकी पड़ी हैं और किसी योजना की समीक्षा नहीं की जा रही है। इससे सामान्य प्रशासनिक कार्यों पर भी व्यापक असर पड़ा है।



सरकार ने लगाया एस्मा, हड़ताल पर छह माह तक रोक

प्रदेश सरकार ने आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू करते हुए छह महीने तक किसी भी प्रकार की हड़ताल पर प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही सरकार ने काम नहीं तो वेतन नहीं का आदेश भी जारी किया गया है। इसके बावजूद कई डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर डटे हैं।



एसडीएम ने लिया स्थिति का जायजा

हड़ताल के बीच बुधवार को बड़खल एसडीएम ने बीके नागरिक अस्पताल का दौरा किया। अधिकारी ने आपातकालीन विभाग और ओपीडी की स्थिति का निरीक्षण किया और सीएमओ से हड़ताल पर गए डॉक्टरों की संख्या सहित अन्य जानकारी मांगी। अधिकारियों ने अस्पताल प्रशासन को मरीजों के उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही न होने के निर्देश भी दिए।

मुझे पिछले दो दिनों से पेट में तेज दर्द है। इलाज के लिए सुबह-सुबह अस्पताल पहुंची। हड़ताल के कारण डॉक्टर कुछ ड्यूटी पर नहीं हैं, जिसकी वजह से मरीजों की भीड़ ज्यादा है। लंबे इंतजार के बाद भी मेरा नंबर नहीं आया। इस वजह से मुझे बिना इलाज कराए ही वापस लौटना पड़ रहा है।-मीनू देवी, बड़खल

मुझे पहले तो खून की जांच कराने के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ा। किसी तरह जांच तो हो गई। जांच के बाद रिपोर्ट लेने के लिए कई काउंटरों के बीच दौड़ाया गया। मैं पूरे दिन की भागदौड़ से परेशान हो गई। अब बिना रिपोर्ट लिए ही घर लौटना पड़ रहा है। यहां हड़ताल की वजह से मरीजों को काफी दिक्कत हो रही है। सामान्य दिनों में भी समस्याएं रहती हैं। यहां आने के बजाय मैं बाहर से ही इलाज कराउंगी। -आरती, एसजीएम नगर निवासी
विज्ञापन


नागरिक अस्पताल में आज कुल 8 डॉक्टरों के अनुपस्थित होने की जानकारी थी। मैंने डॉक्टरों से बात किया जिनमें से दो डॉक्टरों ने ड्यूटी पर लौटने को कहा है। हड़ताल को लेकर सरकार सख्त है। हम किसी भी तरीके से इस हड़ताल को सफल नहीं होने देंगे। स्वास्थ्य जैसे संवेदन मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।- डॉ. जयंत आहूजा , मुख्य चिकित्सा अधिकारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें