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Faridabad News: नीमका जेल में 300 से अधिक कैदी बन रहे साक्षर

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निरक्षर कैदियों के लिए विशेष अभियान शुरू, जेल के भीतर नियमित कक्षाएं लगाई जा रहीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले की नीमका जेल में बंद निरक्षर कैदियों को साक्षर बनाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। सरकार की महत्वाकांक्षी उल्लास योजना के तहत जेल के भीतर निरक्षर कैदियों की नियमित कक्षाएं लगना शुरू हो गई हैं। इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य कैदियों को मुख्यधारा से जोड़ना और उनके भविष्य को सुधारना है।
जेल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार इस बार उल्लास योजना के तहत 390 कैदियों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। इन कैदियों को पढ़ना-लिखना सिखाने के लिए जेल प्रशासन ने 41 वालंटियर लगाए हैं। ये वालंटियर जेल में बंद कैदियों को बहुत ही आसान और सरल तरीके से पढ़ना-लिखना सिखा रहे हैं। कैदियों को पढ़ाई में कोई दिक्कत न हो। इसके लिए जेल प्रबंधन द्वारा उनके लिए कॉपी, पेन, किताबें और अन्य जरूरी स्टेशनरी उपलब्ध कराई जा रही है।
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प्रशासन की इस पहल से कैदियों के व्यवहार और सोच में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जो कैदी कभी अपना नाम तक नहीं लिख पाते थे, वे अब अंगूठे की जगह अपने हस्ताक्षर कर रहे हैं। जेल अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा के माध्यम से कैदी अपराध का रास्ता छोड़कर समाज के जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे।
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25 से अधिक कैदी कर चुके हैं ग्रेजुएशन और पीजी

नीमका जेल के कैदी सिर्फ साक्षर ही नहीं बन रहे, बल्कि उच्च शिक्षा में भी नए आयाम छू रहे हैं। जेल के स्कूल इंचार्ज दिनेश कुमार ने बताया कि जेल में पढ़ाई का माहौल बदल चुका है। अभी तक 25 से अधिक कैदी पढ़-लिखकर स्नातक और स्नातकोत्तर तक की डिग्री हासिल कर चुके हैं। ये कैदी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के माध्यम से अपनी उच्च शिक्षा पूरी कर रहे हैं। इग्नू द्वारा ही इन कैदियों को पढ़ाई से जुड़ी किताबें और अन्य सामग्री मुहैया कराई जाती है।
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