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अरावली वन क्षेत्र में हुए कब्जे प्रशासन के लिए बने नासूर

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फरीदाबाद। अरावली वन क्षेत्र में अवैध कब्जे सरकार और प्रशासन के लिए नासूर बन गए हैं। इनमें फार्म हाउस, कॉलोनी, शिक्षण संस्थान, होटल व सोसाइटियां इत्यादि शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अब इन्हें तोड़ना नगर निगम और वन विभाग के लिए मुश्किल हो रहा है। हालांकि, कोर्ट के सख्त आदेश के बाद निगम ने सूरजकुंड स्थित खोरी कॉलोनी, महालक्ष्मी डेरा, पाली पर बने अवैध निर्माण को तोड़फोड़ कर पूरा साफ कर दिया है। लेकिन, फार्म हाउस व अन्य अवैध निर्माण सरकार के गले की फांस बन गए हैं। इनका केस सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। दूसरी ओर, जमाई कॉलोनी में अभी तोड़फोड़ की तलवार लटक रही है।
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अरावली में वन विभाग की करीब 500 हेक्टेयर जमीन पर अवैध निर्माण है। इनमें लगभग 140 फार्म हाउस, शिक्षण संस्थान, होटल और कॉलोनियां शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नगर निगम और वन विभाग की ओर से दो माह से तोड़फोड़ की कार्रवाई की जा रही है। अब तक नौ फार्म हाउस को तोड़ा जा चुका है। फार्म हाउसों में तोड़फोड़ को बीच में छोड़कर निगम ने कॉलोनियों में कार्रवाई शुरू कर दी। खोरी गांव के बाद दो अन्य कॉलोनी में निगम की ओर से तोड़फोड़ की गई। सैनिक कॉलोनी चौक पर बसी जमाई कॉलोनी में भी दो सप्ताह पहले निगम ने तोड़फोड़ की तैयारी की। लेकिन, स्थानीय लोगों ने पूर्व कैबिनेट मंत्री महेंद्र प्रताप व विजय प्रताप के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कोर्ट से कार्रवाई रोकने की मांग की। विजय प्रताप का कहना है कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भी जमाई कॉलोनी में बड़खल के लोगों की मानी है। निगम की कोई मालकियत ही नहीं है।
आज होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
अरावली वन क्षेत्र में बने फार्म हाउस और जमाई कॉलोनी मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की जाएगी। कोर्ट के नए आदेश पर नगर निगम और वन विभाग आगे की कार्रवाई करेगा। हालांकि, निगम की टीम ने तोड़फोड़ कार्रवाई के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली है।
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सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी अवैध निर्माण पर कोई स्टे नहीं दिया है। ऐसे में अरावली वन क्षेत्र में बने सभी प्रकार के अवैध निर्माण तोड़े जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई है। कोर्ट के नए आदेश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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- राजकुमार, जिला वन अधिकारी
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