फरीदाबाद। जिले के एक मात्र सरकारी अस्पताल में कोई भी न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर नहीं है, जिस कारण बीके अस्पताल में आने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के बाद तुरंत दिल्ली के लिए रेफर कर दिया जाता है।
बीके अस्पताल में हर रोज सैकड़ों की संख्या में मरीज अपना उपचार करवाने के लिए आते हैं, जिसमें से रोज के करीब दो से तीन मरीजों को न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर नहीं होने की वजह से उनको दिल्ली के लिए रेफर कर दिया जाता है। सबसे ज्यादा ट्रॉमा के मरीजों को परेशानी होती है। दुर्घटना में घायल होकर आने वाले मरीज न्यूरोलॉजी डॉक्टर के अभाव में दिल्ली सफदरजंग भेज दिए जाते हैं। इस दौरान कई बार मरीजों की जान जाने का खतरा भी रहता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विनय गुप्ता के अनुसार बीके अस्पताल में कई स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी है। इसे लेकर कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है लेकिन उनकी ओर से कोई भी स्पेशलिस्ट डॉक्टर को नियुक्त नहीं किया गया है जिसकी वजह से मरीज को दिल्ली के लिए रेफर करना पड़ता है।
क्या कहते हैं डॉक्टर
बीते एक साल में करीब 450 से ज्यादा मरीज उनके पास इलाज के लिए पहुंच चुके हैं। इनमें से आधे से ज्यादा मरीजों की पूरी तरह से रिकवरी सफल रही है। यह बीमारी अब बुजुर्गों के साथ युवाओं को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रही है इसलिए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों के लिए थ्रोम्बोलिसिस थेरपी बेहद कारगर है। यदि चार घंटे के अंदर स्ट्रोक के मरीज का इस तकनीक से इलाज किया जाए तो मरीज बिल्कुल ठीक हो सकता है।
- डॉ. रोहित गुप्ता, न्यूरोलॉजी विभाग निदेशक, एस्कॉर्ट फोटिस अस्पताल
कोरोना महामारी के दौरान ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों में तेजी आई है। स्ट्रोक दो प्रकार के होते हैं। पहला सिस्मिक स्ट्रोक होता है, इसमें दिमाग की नसों में रक्त प्रवाह किसी अवरोध के कारण रुक जाता है। दिमाग की नली में खून का थक्का जम जाने से भी ब्रेन हेमरेज हो जाता है जबकि दूसरा प्रकार हेमरेजिक स्ट्रोक होता है। इसमें दिमाग की नस से रक्तस्राव होने लगता है। इसमें मरीज को लकवा मार जाता है। कई मामले में मरीज की जान जाने का खतरा भी रहता है। उनके अस्पताल में दोनों प्रकार के मरीज उपचार के लिए आते हैं।
-डॉ राजेंद्र सिंघला, न्यूरोलॉजिस्ट सर्वोदय अस्पताल
कोविड एक थ्रोम्बोजेनिक बीमारी है जिसमें खून गाढ़ा हो जाता है इसलिए कोविड के इलाज के लिए भी खून पतला करने की दवाइयां दी जाती हैं। खून गाढ़ा होने पर खून के चलने की गति धीमी हो जाती है और खून की नाड़ियों में खून के जमने या क्लॉट बनने की संभावना अधिक बढ़ जाती है इसलिए कोविड के कारण हार्टअटैक और स्ट्रोक के मामले ज्यादा बढे़ हैं।
- विक्रम दुआ, न्यूरोलॉजिस्ट, क्यूआरजी अस्पताल
स्ट्रोक से बचने के उपाय
- शुगर की नियमित जांच कराना
- ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना
- सामान्य मात्रा में मीठे का सेवन करना
- घी, बटर सहित तैलीय चीजों का सेवन कम करना
- भोजन में फल ओर सब्जियों का सेवन ज्यादा करना