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Faridabad News: कूड़ा मुक्त शहर की श्रेणी में नहीं मिले अंक, निगम के लिए बड़ी चुनौती

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समय पर कूड़ा उठाव और सख्त निगरानी ही बनेगी समाधान का रास्ता
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। स्वच्छता सर्वेक्षण-2025 की रिपोर्ट में फरीदाबाद को गार्बेज फ्री सिटी (जीएफसी) में शून्य अंक मिले हैं। यह स्थिति न केवल नगर निगम के लिए चिंता का विषय है बल्कि शहरवासियों के लिए भी सोचने की बात है। लगातार साफ-सफाई के दावे और प्रयासों के बावजूद कचरा प्रबंधन में निगम बुरी तरह फेल हो गया है। गार्बेज फ्री सिटी रेटिंग में एक प्रतिशत भी सफलता न मिलना दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं कितनी कमजोर हैं।

एजेंसी का चयन होने में देरी रही मुख्य कारण
नगर निगम ने कचरा उठाने वाली एजेंसी को कई महीने पहले ब्लैकलिस्ट कर दिया था। इसके बाद पांच साल के लिए नई एजेंसी के चयन को लेकर करीब 200 करोड़ रुपये का टेंडर होना है, जो अब तक चंडीगढ़ से मंजूरी का इंतजार कर रहा है। इसी वजह से फिलहाल कचरा प्रबंधन में ढील देखने को मिल रही है। निगम अधिकारियों का कहना है कि कचरा प्वाइंट से कचरा उठाने वाली मौजूदा कंपनी का काम भी संतोषजनक नहीं है। जुलाई में ही नई एजेंसी चयन की योजना बनाई गई है ताकि सुधार हो सके।
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नगर निगम को कचरा प्रबंधन में ठोस और तेज कदम उठाने की जरूरत
समय पर कूड़ा उठाव की व्यवस्था को दुरुस्त करना होगा।
नई एजेंसी के चयन में पारदर्शिता रखनी होगी ताकि बेहतर कार्य हो सके
निगरानी के लिए एक्टिव मॉनिटरिंग टीम का गठन करना जरूरी है, जो रोजाना रिपोर्ट ले और फील्ड में काम को परखे।
शहर के विभिन्न स्थानों पर गीला और सूखा कचरा अलग-अलग जमा कराने की व्यवस्था को लागू करना होगा।
कचरा प्वाइंट पर सेंसिटिव कैमरे और लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम से निगरानी बढ़ानी होगी।

टेंडर के बाद सुधरेंगे हालात
नगर निगम के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि नए टेंडर के बाद हालात सुधरेंगे, लेकिन जब तक ठोस एक्शन नहीं लिया जाएगा, तब तक फरीदाबाद का कचरा प्रबंधन जीरो रेटिंग से ऊपर नहीं जा सकेगा। नगर निगम के लिए अब यह समय खुद को साबित करने का है।
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आरडब्ल्यूए को भी करना होगा सहयोग
निगम की तरफ से टेंडर न होने की स्थिति में कई स्थानों पर आरडब्ल्यूए व कई स्थानों पर स्थानीय निगम पार्षद के नेतृत्व में डोर टू डोर कूड़ा उठाने का काम किया जा रहा है। वहीं निजी ठेकेदारों की मदद से यह काम चल रहा है लेकिन निजी ठेकेदार व कर्मचारी ठीक से अपना काम नहीं कर रहे हैं उन्हें यह भी पता है कि लोगों के पास अभी कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है वे लोग इसका फायदा उठा रहे हैं। आरडब्ल्यूए व स्थानीय नेताओं को आगे आकर निगम के साथ मिलकर इस परेशानी से निजात दिलवाने के लिए काम करना चाहिए।
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