फरीदाबाद निगम अधिकारियों की लापरवाही से एनएच-1 पुरानी सब्जी मंडी के सैकड़ों दुकानदार एक साल से कब्जे के लिए भटक रहे हैं लेकिन उन्हें दुकानों पर कब्जा नहीं मिल पा रहा है। वहां न तो पाइपलाइन डाली गई, न ट्यूबवेल लगाए गए और न ही सड़क बनाई जा रही है।
200 से अधिक दुकानदार प्रतिदिन निगम अधिकारियों के चक्कर लगाते रहते हैं लेकिन उन्हें आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिल रहा। अब दुकानदारों ने चक्का जाम करने की चेतावनी दी है।
दुकानदार रोहताश शर्मा, महेंद्र कुमार, ओम प्रकाश, काले आदि का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद करीब 240 दुकानदार पात्र पाए गए हैं। पिछले साल 5 अप्रैल को नगर निगम ने बेतरतीब तरीके से बनी दुकानों को तोड़ दिया लेकिन उन्हें व्यवस्थित तरीके से तैयार कर पात्र दुकानों को पजेंशन तक नहीं दिया गया।
ये है सब्जी मंडी का पूरा मामला:
वर्ष 1960 के आसपास पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए लोगों को जीविका चलाने के लिए तत्कालीन सरकार ने लोगों को निगम की छोटी-छोटी दुकानें बनाकर ड्रॉ के जरिए उन्हें लीज पर दिया था। उक्त लोगों से दुकानों की कीमत के साथ-साथ विकास शुल्क भी जमा कराए गए थे। उस दौरान लोगों को 115 दुकानें, 84 मकान व 9 वर्कशॉप अलॉट किए गए थे। बाद में कुछ लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी और उन्हें भी निगम की सूची में शामिल कराने की मांग की। हाईकोर्ट के आदेश पर नगर निगम ने सर्वे कर रिपोर्ट दी जिसमें पात्रों की संख्या बढ़कर 235 तक हो गई।
हाईकोर्ट को आदेश पर की गई थी तोड़फोड़ की कार्रवाई:
शॉपकीपर्स एसोसिएशन, किशनचंद व अन्य, विक्रम खत्री व अन्य बनाम हरियाणा सरकार के मामले में सुनवाई पूरी करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 9 जुलाई 2013 को आदेश पारित करते हुए सभी पात्रों को दुकान आवंटित करने का आदेश दिया। काफी समय तक मामला लंबित रहा। निगम अधिकारियों ने इसकी जहमत नहीं उठाई। दोबारा हाईकोर्ट के फटकार के बाद निगम अधिकारियों ने पुरानी सब्जी मंडी से कब्जा हटाने का निणर्य लिया। पांच अप्रैल 2015 को निगम ने व्यापक पैमाने पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की।
पात्र आवेदकों से कुछ जरूरी कागजात उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। कागजात उपलब्ध होने के बाद धीरे-धीरे पजेशन देने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।-डॉ. आदित्य दहिया, निगमायुक्त नगर निगम