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सरकारी तंत्र में फंसा निकिता का केस

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फरीदाबाद। बीकॉम अंतिम वर्ष की छात्रा निकिता तोमर हत्या मामले में निकिता का केस कोर्ट में जाने से पहले सरकारी तंत्र में फंसकर रह गया। इधर निकिता के परिजन कोर्ट कचहरी से अपने केस की फाइल को निकलवाने में उलझे रहे और दोनों आरोपियों की याचिका कोर्ट में मंजूर भी हो गई। निकिता के परिजनों ने भी कोर्ट में अपील कर रखी है, लेकिन वह अभी मंजूर नहीं हुई है।
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28 जून को जस्टिस अल्का सरीन व ऋतू बाहरी ने मुख्य आरोपी तौसीफ की याचिका मंजूर कर ली। तौसीफ ने अपनी याचिका में कहा है कि उसका इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। पुलिस ने उसे बेवजह फंसाया है। आरोपी रेहान की याचिका लॉकडाउन से पहले ही मजूर हो चुकी थी।
वहीं, निकिता के पिता मूलचंद तोमर ने बताया कि उनका केस केवल शुरुआत में ही जल्दी से निपटाया गया था। अब उन्हें न्याय के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। उन्हें हाईकोर्ट में याचिका डालने से पहले जिला न्यायवादी से अपने केस की फाइल निकलवाने में ही काफी समय लग गया। उनके केस की फाइल कोर्ट में निजी अधिवक्ताओं के जरिये काफी पहले जा चुकी है, लेकिन केस की फाइल सरकार द्वारा कोर्ट में लगाई जाएगी। सरकारी विभाग से अपने केस को आगे निकलवाने में उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
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उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ तक आने जाने में ही उनके परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने लगी है। सेशन कोर्ट में निकिता का केस उसके मामा एदल सिंह रावत ने लड़ा था। हाईकोर्ट में उन्हें अलग से अधिवक्ताओं की जरूरत पड़ रही है। उनकी फीस को लेकर भी परिवार की चिंता बढ़ी हुई है। वहीं तौसीफ के अधिवक्ता अनीस खान ने बताया कि रेहान और तौसीफ दोनों की याचिकाएं कोर्ट में सुनवाई के लिए मंजूर हो चुकी हैं। रेहान की तरफ से कोर्ट में अधिवक्ता सुवीर सिंह और तौसीफ की तरफ से सरफराज हुसैन इस मामले को देख रहे हैं। केस की सुनवाई के दौरान और अधिवक्ता भी बढ़ाए जा सकते हैं।
एक जुलाई को होगी अपहरण मामले की सुनवाई
अनीस खान ने बताया कि साल 2018 में दर्ज निकिता के अपहरण मामले में एक जुलाई को सुनवाई होनी है। क्राइम ब्रांच डीएलएफ ने इस मामले में तौसीफ के पिता जाकिर हुसैन, मां असमीना व चाचा जावेद हुसैन को षड्यंत्र में शामिल होने के तहत आरोपी बनाया है। इस केस में तीनों आरोपी फिलहाल जमानत पर हैं। उनकी तरफ से अदालत में अपील की गई है कि इस केस को खारिज किया जाए, जबकि निकिता का परिवार केस को आगे चलाने के पक्ष में है। केस को खारिज करने की बात को लेकर एक जुलाई को अदालत में बहस की जाएगी।
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