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Faridabad News: विटामिन डी और कैल्शियम की कमी का शिकार हो रहे नवजात

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जिला अस्पताल में हर माह आ रहे करीब डेढ़ सो शारीरिक व मानसिक विकारों से प्रभावित बच्चे
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संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। विटामिन डी और कैल्शियम की कमी का शिकार केवल महिलाएं ही नहीं हो रहीं बल्कि नवजात भी हो रहे हैं। जिला नागरिक अस्पताल में हर माह लगभग डेढ़ सौ शारीरिक व मानसिक विकारों से ग्रसित बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इन बच्चों में अधिकांश शून्य से दो वर्ष की आयु के बच्चे शामिल हैं।
जिला नागरिक अस्पताल में चल रहे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों के शारीरिक व मानसिक रोगों का इलाज किया जाता है। यहां हर माह करीब डेढ़ सौ ऐसे बच्चों को उपचार दिया जाता है जोकि क्लब फुट और सैरेब्रल प्लासी का शिकार हो चुके हैं। यहां इन बच्चों की फिजियोथेरेपी के अलावा न्यूट्रीशियन व डाइटिशियन द्वारा इलाज किया जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान जिन महिलाओं में कैल्शियम और विटामिन डी की कमी अधिक हो जाती है। उसका सीधा प्रभाव बच्चोंं के मानसिक और शारीरिक विकास पर पड़ जाता है। ऐसे में बच्चे के जन्म से क्लब फुट व सैरेब्रल प्लासी के शिकार होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है। ऐसे में जन्म के बाद ही बच्चे की हड्डियों व अन्य जांच करवा लेने चाहिए। साथ ही समय-समय पर भी बच्चों की शारीरिक व मानसिक जांच करवाते रहना चाहिए।
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हर माह किया जा रहा करीब डेढ सौ बच्चों का इलाज
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिला अस्पताल में मई माह में 66 बच्चे क्लब फुट व 102 बच्चे सैरेब्रल प्लासी के इलाज के लिए पहुंचे। जून माह में 66 क्लब फुट व 110 सैरेबल प्लासी, जुलाई माह में 57 क्लब फुट, 103 बच्चे सैरेब्रल प्लासी के, अगस्त माह में 44 क्लब फुट और 115 सैरेब्रल प्लासी, सितंबर माह में 63 क्लब फु़ट और 79 सैरेब्रल प्लासी अक्टूबर माह में 57 क्लबफुट और 103 सैरेब्रल प्लासी के जबकि नवंबर माह में 54 बच्चे क्लबफुट के व 186 बच्चे सैरेब्रल प्लासी के इलाज के लिए पहुंचे।


क्या है क्लबफुट और सैरेब्रल प्लासी
जिन बच्चों के जन्म से ही पैर टेढे-मेढे़ हो जाते है उन बच्चों को क्लब फुट की श्रेणी में रखा जाता है। जबकि जिन बच्चों का आयु के मुताबिक शारीरिक व मानसिक विकास नहीं हाे पाता उन्हें सैरेब्रल प्लासी की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे में बच्चे अपनी आयु के मुताबिक कार्य नहीं कर पाते।
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महिलाओं के साथ-साथ ही बच्चों को पर्याप्त पोषक तत्वों, विशेषकर कैल्शियम और विटामिन डी से युक्त संतुलित आहार देना चाहिए। जन्म के बाद से बच्चों को शारीरिक रूप से एक्टिव रहने विशेष ध्यान देना चाहिए। बच्चों को सही मुद्रा में बैठना, खेलना- कूदना सिखाएं। अगर बच्चे में ऐसी किसी स्थिति का पता चलता है तो नियमित रूप से डॉक्टर को दिखाएं और डॉक्टर के बताए निर्देशों का पालन करें।किसी भी समस्या का शीघ्र पता लगाने के लिए बाल रोग विशेषज्ञ या हड्डी रोग विशेषज्ञ से नियमित जांच कराएं।- फिजियोथेरेपिस्ट डॉ खुशबू कुमारी
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