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Faridabad News: सीवर की गैस से निगम के सफाई कर्मचारी की मौत

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नगर निगम ने गंभीर मामला मानते हुए एडिशनल कमिश्नर के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित की
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सेक्टर-19 में बृहस्पतिवार को सीवर की सफाई के दौरान नगर निगम के नियमित कर्मचारी जोगिंदर पहलवान (50) की दम घुटने से मौत हो गई। कर्मचारी की मौत ने शहर की सीवर सफाई व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस क्षेत्र में सीवर सफाई का कार्य पहले से आउटसोर्स एजेंसी को सौंपा गया था, वहां नगर निगम का स्थायी कर्मचारी बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के सीवर में कैसे उतर गया। नगर निगम ने भी इसे गंभीर मामला मानते हुए एडिशनल कमिश्नर परमजीत चहल के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित कर दी है और पुलिस को शिकायत भी दी गई है।

घटना बृहस्पतिवार दोपहर सेक्टर-19 स्थित सांझा चूल्हा रेस्तरां के पास हुई। कर्मचारियों के अनुसार, सुबह जोगिंदर और उनके साथी ब्रह्मपाल मौके पर पहुंचे थे। दोपहर करीब 12 बजे जोगिंदर सीवर के अंदर उतरे, जहां जहरीली गैस के कारण उनका दम घुट गया। इसके बाद निगम और पुलिस को सूचना दी गई। करीब 1 बजे उन्हें सीवर से बाहर निकाला गया।
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नगर निगम का कहना है कि इस क्षेत्र की सीवर सफाई का कार्य आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से कराया जाता है। ऐसे में नियमित कर्मचारी वहां किसके निर्देश पर पहुंचा और सीवर में क्यों उतरा, यही जांच का सबसे महत्वपूर्ण विषय होगा। निगम आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा ने जांच कमेटी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी तय की जाए और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

दूसरी ओर सफाई कर्मचारियों का आरोप है कि मौके पर जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं थे। सफाई कर्मचारी यूनियन के नेता अनूप ने आरोप लगाया कि बिना ऑक्सीजन मास्क और गैस जांच उपकरण के ही जोगिंदर को सीवर में उतारा गया। हालांकि संबंधित जेई महेंद्र का कहना है कि उन्होंने किसी कर्मचारी को सीवर में उतरने के निर्देश नहीं दिए और उन्हें घटना की जानकारी बाद में मिली।

घटना के बाद सफाई कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। यूनियन का कहना है कि पिछले 40 दिनों में सीवर और एसटीपी की सफाई के दौरान यह पांचवीं मौत है लेकिन अब तक जिम्मेदार लोगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। शुक्रवार को नगर निगम मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।



पलवल के रहने वाले थे जोगिंदर

जोगिंदर पलवल के मीतरोल गांव के रहने वाले थे। उनके परिवार में दो बेटियां और एक बेटा है। वह कई वर्षों से नगर निगम में नियमित कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे और गांव में पहलवानी करने के कारण साथी उन्हें पहलवान के नाम से भी जानते थे।



जब सफाई आउटसोर्स थी तो निगम कर्मचारी कैसे पहुंचा

नगर निगम स्वयं स्वीकार कर रहा है कि सेक्टर-19 क्षेत्र में सीवर सफाई का कार्य एजेंसी के माध्यम से कराया जाता है। ऐसे में यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण बन गया है कि नियमित कर्मचारी मौके पर किसके निर्देश पर पहुंचा और सीवर में क्यों उतरा। यदि एजेंसी की जिम्मेदारी थी तो क्या उसने काम नहीं किया या फिर किसी अधिकारी के मौखिक निर्देश पर कर्मचारी को भेजा गया। जांच कमेटी इन्हीं बिंदुओं पर जिम्मेदारी तय करेगी।



क्या कहते हैं सीवर सफाई के नियम


नियमों के अनुसार, सीवर के अंदर किसी व्यक्ति को उतारकर सफाई करवाने की अनुमति नहीं है। यह काम मशीन की मदद से किया जाता है। कोर्ट के निर्देश के बाद इस पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। वहीं अगर किसी कारण से किसी को सीवर में उतरना भी पड़ रहा है तो सुरक्षा को लेकर सख्त ध्यान रखने चाहिए। ऑक्सीजन सिलिंडर के साथ रेस्क्यू टीम व अन्य व्यवस्था होनी चाहिए।



यूनियन ने लगाए गंभीर आरोप

सफाई कर्मचारी यूनियन का आरोप है कि जोगिंदर को केवल सुरक्षा बेल्ट दी गई थी, जबकि ऑक्सीजन मास्क और गैस जांच जैसे जरूरी उपकरण उपलब्ध नहीं थे। यूनियन का कहना है कि लगातार हो रही मौतों के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया। मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने और जिम्मेदार अधिकारियों व संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है।


निगम मुख्यालय का किया घेराव
जानकारी के अनुसार, घटना की जानकारी पाकर मौके पर काफी संख्या में नगर निगम के सफाई कर्मचारी पहुंच गए। उन्होंने लापरवाही का आरोप लगाते हुए नगर निगम मुख्यालय का घेराव किया | इस दौरान कर्मचारियों ने निगम आयुक्त से मुलाकात भी की और जांच की मांग की |



जांच कमेटी इन सवालों के जवाब तलाशेगी

जांच कमेटी यह पता लगाएगी कि जोगिंदर को सीवर की सफाई के लिए किसने भेजा, क्या संबंधित अधिकारी की मौखिक अनुमति थी, आउटसोर्स एजेंसी की भूमिका क्या थी, क्या मौके पर सुरक्षा उपकरण मौजूद थे, सीवर में उतरने से पहले गैस की जांच की गई थी या नहीं और क्या मशीन से सफाई संभव होने के बावजूद कर्मचारी को सीवर में उतारा गया।


40 दिन में पांच मौतों ने बढ़ाई चिंता

पिछले लगभग 40 दिनों में सीवर और एसटीपी की सफाई के दौरान पांच कर्मचारियों की जान जा चुकी है। सबसे पहले मई में बीपीटीपी क्षेत्र में दो सफाई कर्मचारियों की मौत हुई। इसके बाद मंगलवार को जीवन नगर स्थित एसटीपी की सफाई के दौरान दो कर्मचारियों की जान चली गई। अब सेक्टर-19 में जोगिंदर की मौत ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रही घटनाओं के बाद भी यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति की आशंका बनी रहेगी।



आज यूनियन करेगी प्रदर्शन

आज शुक्रवार को नगर निगम सफाई कर्मचारियों की यूनियन अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन करेगी। यूनियन के प्रधान नरेश शास्त्री ने बताया कि लगातार हो रही मौतों के बाद भी प्रशासन की तरफ से इसपर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हम इसके विरोध में निगम मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। जब तक सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए पार्यप्त इंतजाम नहीं होते व उनको न्याय नहीं मिलता जब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।



पुलिस ने किया था कर्मचारी को बचाने का प्रयास
जानकारी के अनुसार, सूचना पर सेक्टर-19 चौकी प्रभारी अजय कुमार भी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने भी बचाव कार्य में मदद की। इस दौरान एंबुलेंस को बुलाने की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया। जब जोगिंदर को मैनहोल से बाहर निकाल लिया गया तो अजय कुमार ने एंबुलेंस के इंतजार में समय गंवाना ठीक नहीं समझा। उन्होंने जोगिंदर को अपनी गाड़ी में डालकर अस्पताल पहुंचवाया जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। चौकी इंचार्ज अजय कुमार ने बताया कि अभी परिजनों ने कोई लिखित शिकायत नहीं दी है, शिकायत मिलते ही मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
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इस इलाके की सफाई व्यवस्था आइटसोर्स से करवाई जाती है यहां पर निगम के कर्मचारियों को सीवर की सफाई नहीं करनी होती। निगम के कर्मचारी सीवर में क्यों उतरे इसकी जांच के लिए अतिरिक्त आयुक्त के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया है।
- धीरेंद्र खड़गटा, निगम आयुक्त




पहले भी हो चुके हैं हादसे
-2 मई को सेक्टर-84 क्षेत्र में सीवर की सफाई के दौरान दम घुटने से दो सफाई कर्मियों की मौत |
-15 मई 2025: सिकरी गांव में सेप्टिक टैंक साफ करते समय मजदूर और मालिक की दम घुटने से मौत।
-20 मार्च 2025: सेक्टर 7-10 मार्केट में सीवरेज खोलते समय गैस की चपेट में आने से कामगार की मौत।
-05 अक्तूबर 2022: निजी अस्पताल के टैंक में दम घुटने से चार लोगों की सामूहिक मौत।
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