अब परिवार के साथ जी रहे अच्छी जिंदगी
भारती दुबे
फरीदाबाद। अंगदान को लेकर अक्सर लोगों के मन में कई तरह की भ्रांतियां रहती हैं, लेकिन जब किसी अपने की जिंदगी बचाने की बात आती है तो परिवार की महिलाएं सबसे आगे खड़ी नजर आती हैं। मां ने बेटे के लिए तो पत्नी ने पति के लिए अपनी किडनी दान कर उन्हें नई जिंदगी दी।
ग्रेटर फरीदाबाद सेक्टर-86 स्थित एकॉर्ड अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. जितेंद्र कुमार के अनुसार गंभीर बीमारी के कारण जब किसी मरीज की किडनी काम करना बंद कर देती है तो लंबे समय तक डायलिसिस के बजाय उपयुक्त मरीजों में किडनी प्रत्यारोपण बेहतर विकल्प हो सकता है। फरीदाबाद के निजी अस्पतालों में हर महीने करीब एक से दो किडनी प्रत्यारोपण किए जाते हैं।
वहीं, सेक्टर- 21ए स्थित एशियन अस्पताल के नेफ्रोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट मेडिसिन निदेशक डॉ. सागर गुप्ता ने बताया कि कई मामलों में महिलाएं अपने परिवार के सदस्यों को किडनी दान करने के लिए आगे आती हैं। इसके पीछे परिवार के प्रति भावनात्मक जुड़ाव और अपनों को बचाने की इच्छा प्रमुख कारण होती है। वहीं पुरुषों में परिवार की जिम्मेदारियां और मधुमेह जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं कई बार उन्हें अंगदान के लिए उपयुक्त डोनर बनने से रोक सकती हैं।
मां ने बेटे को दी किडनी, खत्म हुई डायलिसिस
ग्रेटर फरीदाबाद के हेमंत कुमार ने बताया कि मैं लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहा था। मैं 53 साल का हूं। नियमित डायलिसिस पर निर्भर था। जांच में मेरी मां राजरानी की किडनी मैच होने के बाद एकॉर्ड अस्पताल में प्रत्यारोपण किया गया। डॉक्टर के अनुसार ऑपरेशन के बाद प्रत्यारोपित किडनी ने बेहतर काम करना शुरू कर दिया और मेरी डायलिसिस की जरूरत खत्म हो गई। अब मैं बिल्कुल स्वस्थ हूं।
दर्द की दवा के बाद किडनी फेल, मां ने दिया जीवनदान
सोहना की रहने वाली अंजू ने बताया कि मुझे फ्रैक्चर के बाद लंबे समय तक दर्द निवारक दवाएं लेनी पड़ीं। इसके बाद 23 साल में ही मेरी किडनी गंभीर रूप से प्रभावित हो गई और किडनी फेल की स्थिति पैदा हो गई। मेरी मां गजन ने मुझे किडनी दान की। एशियन अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण किया गया। डॉ. सागर गुप्ता द्वारा प्रत्यारोपण के बाद अब मैं बिल्कुल स्वस्थ हूं।
पति के लिए पत्नी ने दान की किडनी
ग्रेटर फरीदाबाद के अमित कुमार ने बताया कि मैं वर्ष 2022 से डायलिसिस पर था। मई 2026 में मेरी पत्नी संतोष ने अपनी किडनी दान की। मैं बहुत परेशान था। एशियन अस्पताल में प्रत्यारोपण के बाद मेरी सेहत में सुधार हुआ और अब मैं सामान्य जीवन जी रहा हूं।