फरीदाबाद (अमित भाटिया)। झारखंड के जामताड़ा में मोबाइल टॉवर के नेटवर्क हर घंटे बदलते रहते हैं। इसकी वजह यह है कि जामताड़ा के साथ एक तरफ धनबाद की सीमा लगती है और एक तरफ पश्चिम बंगाल का बार्डर है। ऐसे में ये ठग लोकेशन बदलने के लिए कभी धनबाद सीमा में तो कभी पश्चिम बंगाल और कभी जामताड़ा में ही बैठकर लोगों को ठगी के लिए फोन करते हैं। ऐसे में पुलिस भी गच्चा खा जाती है कि आखिर फोन आया कहां से है।
हालांकि अब जामताड़ा के आसपास की लोकेशन से आने वाले फोन कॉल पर पुलिस मानकर चलती है कि यह काम जामताड़ा के ठगों का है। जामताड़ा में साइबर ठगों को पकड़ने गई फरीदाबाद की साइबर सेल की टीम को 12 दिन तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान पुलिस ने उनकी रेकी की तो पता चला कि आलीशान कोठियों में रहने वाले ये ठग जंगल में खेतों के बीच बने अड्डों से सारा नेटवर्क चलाते हैं।
फरीदाबाद पुलिस के साइबर सेल ने 19 अगस्त को जामताड़ा से साइबर ठगी करने कर लोगों के खाते खाली करने वाले गिरोह के चार आरोपियों अजय मंडल, शत्रुघन मंडल, भरत मंडल, नरेंद्र मंडल व इनके एक साथी जालंधर निवासी सौरभ को गिरफ्तार किया था। रिमांड के दौरान आरोपियों से बरामद मोबाइल फोन व लैपटॉप की जांच करने पर पता चला कि इन्होंने हाल फिलहाल में 300 से अधिक लोगों के खातों में सेंध लगाई है। पुलिस ने बताया कि यह गिरोह काफी शातिराना तरीके से काम करता है। पुलिस को इनकी लोकेशन न मिल सके।
इसके लिए जामताड़ा के साथ लगते धनबाद जिले या फिर पश्चिम बंगाल की सीमा के जाकर भी फोन करते हैं। इससे इनके मोबाइल का नेटवर्क बदल जाता है और पुलिस चक्कर खा जाती है कि अपराधी एक जगह से दूसरी जगह जा रहा है। जंगल होने के कारण यहां मोबाइल नेटवर्क के टॉवर भी बदलते रहते हैं।
जंगल में खेतों के बीच बने हैं इनके अड्डे
साइबर सेल के एक जांच अधिकारी ने बताया कि जामताड़ा में अपराधियों को पकड़ने के दौरान पुलिस ने कई दिन तक इनकी रेकी की थी। इस दौरान पता चला कि जंगल के बीच खेतों में इनके अड्डे बने हुए हैं। कई स्थानों पर तो ठगों ने मोबाइल नेटवर्क के लिए मचान तक बना रखी थी ताकि मोबाइल सिगनल मिलने में कोई परेशानी न हो। गिरोह ने गांव में कई आलीशान कोठियां बना रखी हैं, मगर वहां से काम करने की बजाय वो अपने अड्डों पर ही आते थे।
पुलिस ने बैंकों को नोटिस देना शुरू किया
पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से बरामद लैपटॉप व मोबाइल फोन से जुड़े बैंक खातों की पड़ताल करते हुए पुलिस ने बैंकों को नोटिस देकर उनसे खाते से निकले रुपयों की डिटेल मांगनी शुरू कर दी है ताकि पता चल सके कि गिरोह ने इन पैसों को कहां और कैसे खपाया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार इसमें अभी कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।