यह तो वह मामले हैं, जो चर्चित रहे थे, मगर ऐसे दर्जनों और मामलों में मृतकों के परिजनों को रिपोर्ट का इंतजार है। पोस्टमार्टम हाउस में रखे 60 से अधिक विसरा बता रहे हैं कि अभी इन लोगों की मौत के राज से पर्दा नहीं उठा है। किस कारण इन लोगों की मौत हुई इस बारे में न तो उनके घर वालों को पता चला है और न ही पुलिस ने जानने की कोशिश की है।
हर माह होते हैं 100 से अधिक पोस्टमार्टम
बीके सिविल अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. सविता यादव ने बताया कि हर माह 100 से अधिक पोस्टमार्टम किए जाते हैं। इनमें संदिग्ध मामलों में पुलिस मृतक का विसरा सुरक्षित रखवा लेती है, जिसे वह जांच के लिए यहां से भोंडसी, गुरुग्राम या फिर मधुबन, करनाल स्थित पुलिस की फोरेंसिक प्रयोगशाला में भिजवाती है।
क्या-क्या लिया जाता है विसरा में
- मृतक के लीवर का टुकड़ा
- किडनी का टुकड़ा
- स्पलीन (तिल्ली)
- स्टमक (खाने की थैली)
- छोटी आंत का टुकड़ा
पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टर मृतक के शरीर से विसरे के लिए जरूरी अंग निकाल कर सुरक्षित रख देते हैं। इन अंगों को कांच की बोतल में रसायन के घोल में रखा जाता है, जिन्हें पुलिस जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजती है। इन अंगों की जांच से मृतक की मौत का कारण स्पष्ट होने में काफी हद तक मदद मिलती है। डॉ. सौरभ गहलोत के अनुसार सुरक्षित किए गए विसरा को यदि तीन माह में जांच के लिए नहीं भेजा जाए तो रिपोर्ट प्रभावित हो सकती है।
बीके सिविल अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. सविता यादव बताती हैं कि पोस्टमार्टम के बाद जो विसरा सुरक्षित रखवाया जाता है, पुलिस उसे खुद ही जांच के लिए प्रयोगशाला में भिजवाती है। इसमें अस्पताल प्रबंधन की कोई भूमिका नहीं होती।
वहीं फरीदाबाद पुलिस प्रवक्ता सूबे सिंह कहते हैं कि जो विसरा पोस्टमार्टम हाउस में रखे हुए हैं, वह भी किसी न किसी कारण से रखे गए होंगे। इस मामले में संबंधित जांच अधिकारियों से बात की जाएगी। जल्द से जल्द उन्हें जांच के लिए भिजवाया जाएगा।