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खुलासा: इंतजार करते रह जाते हैं परिजन और अस्पताल के बोतलों में सड़ जाते हैं मौत के सबूत

Sat, 30 Nov 2019 11:00 PM IST
नोएडा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
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बीके सिविल अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में रखे दो से तीन साल पुराने विसरा सैंपल, जोकि अब खराब होन? - फोटो : Faridabad
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फरीदाबाद। जिले के बीके सिविल अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में ही पत्थर की बनी एक रैक पर रखी बोतलों में कई मौतों के अहम सबूत बंद पड़े हैं। कई लावारिस लोगों की मौतें तो ऐसी हैं, जिनका राज तो विसरा की आड़ में बोतलों में लगभग दफन होकर रह चुका है। अपनों की मौत का राज जानने के लिए उनके परिजन भी बेकरार हैं, मगर महीनों से करीब 60 से ज्यादा विसरा जांच के लिए पोस्टमार्टम हाउस के कमरे में बंद पड़े हैं।

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इस साल 23 जुलाई को सेक्टर-46 निवासी विनीत जायसवाल ने अपने घर में गैस मास्क लगाकर किसी जहरीली गैस से आत्महत्या कर ली थी। विनीत लिफ्ट बनाने वाली कंपनी कोन के निदेशक थे। इस मामले में पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवा उनका विसरा जांच के लिए रख लिया था। विसरा जांच के लिए लिए भोंडसी गुरुग्राम स्थित लैब भी भिजवा दिया गया, मगर आज तक उस मामले में कोई रिपोर्ट नहीं आ सकी है।

इसी तरह अहीरवाड़ा, बल्लभगढ़ निवासी 20 वर्षीय दीपक एनआईटी-5 स्थित एक कैफे में काम करता था। 13 जून को वह घर नहीं पहुंचा। अगले दिन तड़के दीपक के घर उसकी मौत की खबर पहुंची। रात को वह अपने एक दोस्त कुनाल के घर रुका था।
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कुनाल ने पुलिस को बताया था कि दीपक रात को कोई नशीला पदार्थ सूंघ रहा था, जिसके बाद उसकी तबियत बिगड़ गई। वह उसे अस्पताल लेकर पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने दीपक के विसरे को भी जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा था। दीपक के परिजनों को आज भी उस रिपोर्ट का इंतजार है ताकि बेटे की मौत की राज से पर्दा उठ सके।

किस कारण हुई मौत, नहीं पता चल पाया

यह तो वह मामले हैं, जो चर्चित रहे थे, मगर ऐसे दर्जनों और मामलों में मृतकों के परिजनों को रिपोर्ट का इंतजार है। पोस्टमार्टम हाउस में रखे 60 से अधिक विसरा बता रहे हैं कि अभी इन लोगों की मौत के राज से पर्दा नहीं उठा है। किस कारण इन लोगों की मौत हुई इस बारे में न तो उनके घर वालों को पता चला है और न ही पुलिस ने जानने की कोशिश की है।

हर माह होते हैं 100 से अधिक पोस्टमार्टम

बीके सिविल अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. सविता यादव ने बताया कि हर माह 100 से अधिक पोस्टमार्टम किए जाते हैं। इनमें संदिग्ध मामलों में पुलिस मृतक का विसरा सुरक्षित रखवा लेती है, जिसे वह जांच के लिए यहां से भोंडसी, गुरुग्राम या फिर मधुबन, करनाल स्थित पुलिस की फोरेंसिक प्रयोगशाला में भिजवाती है।

क्या-क्या लिया जाता है विसरा में

- मृतक के लीवर का टुकड़ा
- किडनी का टुकड़ा
- स्पलीन (तिल्ली)
- स्टमक (खाने की थैली)
- छोटी आंत का टुकड़ा
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तीन माह के अंदर जांच होने पर ही मिलती है सटीक रिपोर्ट:

पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टर मृतक के शरीर से विसरे के लिए जरूरी अंग निकाल कर सुरक्षित रख देते हैं। इन अंगों को कांच की बोतल में रसायन के घोल में रखा जाता है, जिन्हें पुलिस जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजती है। इन अंगों की जांच से मृतक की मौत का कारण स्पष्ट होने में काफी हद तक मदद मिलती है। डॉ. सौरभ गहलोत के अनुसार सुरक्षित किए गए विसरा को यदि तीन माह में जांच के लिए नहीं भेजा जाए तो रिपोर्ट प्रभावित हो सकती है।

बीके सिविल अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. सविता यादव बताती हैं कि पोस्टमार्टम के बाद जो विसरा सुरक्षित रखवाया जाता है, पुलिस उसे खुद ही जांच के लिए प्रयोगशाला में भिजवाती है। इसमें अस्पताल प्रबंधन की कोई भूमिका नहीं होती।

वहीं फरीदाबाद पुलिस प्रवक्ता सूबे सिंह कहते हैं कि जो विसरा पोस्टमार्टम हाउस में रखे हुए हैं, वह भी किसी न किसी कारण से रखे गए होंगे। इस मामले में संबंधित जांच अधिकारियों से बात की जाएगी। जल्द से जल्द उन्हें जांच के लिए भिजवाया जाएगा।
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