फरीदाबाद (धनंजय चौहान)। नगर निगम में हुए करीब सौ करोड़ रुपये के घोटालों की जांच फाइलों में दब कर रह गई है। दो माह पहले नवंबर में नगर निगम पार्षदों ने सदन की बैठक में घोटाले के मुद्दों को जोरशोर से उठाया था। बावजूद इसके प्रशासन की ओर से दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इससे भ्रष्टाचार का मामला एक बार फिर ठंडे बस्ते में जाता दिखाई दे रहा है।
ऐसे उजागर हुआ था घोटाला:
बीते तीन वर्षों में नगर निगम में तीन बड़े घोटाले सामने आ चुके हैं। इनमें एक सबसे बड़ा घोटाला जुलाई 2020 में सामने आया था। इसमें शहर के 40 वॉर्डों में से 10 वॉर्ड ऐसे मिले जहां पर विकास कार्यों की एक ईंट तक नहीं लगी और ठेकेदार को करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया था। मामला सेक्टर-37 वार्ड पार्षद दीपक चौधरी की ओर से वित्तीय खर्च की जानकारी के बाद उजागर हुआ था।
मामले में पार्षदों ने निगम की वित्तीय शाखा से लिखित जानकारी मांगी। पार्षदों को वित्तीय शाखा से मिली जानकारी में ठेकेदार को केवल नालियों की मरम्मत, इंटरलॉकिंग टाइल बिछाने और स्लैब लगाने जैसे तीन कामों के लिए करोड़ों रुपये का भुगतान रिकॉर्ड में दिखाया गया। यह सभी भुगतान जनरल फंड से किए गए। वहीं, उस वक्त निगम के जनरल फंड अकाउंट खाली पड़ा था। यह बात भी ध्यान देने लायक है कि पिछले चार साल से सभी कार्य मुख्यमंत्री घोषणा फंड से हो रहे हैं।
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जांच पूरी भी नहीं तभी अचानक लग गई आग
मामला खुलने के बाद राज्य सरकार ने नगर निगम में बिना काम किए भुगतान करने वाले चार पार्षदों की ओर से मिली शिकायत पर जांच मंडलायुक्त संजय जून को सौंप थी। कथित घोटाले की जांच अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि इससे पहले ही 17 अगस्त को निगम की वित्तीय शाखा में आग लग गई। इस आग में वित्तीय शाखा का रिकॉर्ड व अन्य सामान जलकर राख हो गए। अचानक लगी इस आग के बाद चर्चाएं गर्म थी कि इसके पीछे 50 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच पर पर्दा डालने की साजिश है। हालांकि तत्कालीन निगम आयुक्त डॉ. यश गर्ग ने इस अग्निकांड की जांच के लिए निगम अधिकारियों की तीन सदस्य कमेटी गठित की थी। इस कमेटी को 10 दिन में अपनी रिपोर्ट निगमायुक्त को सौंपनी थी। यह फाइल भी दब कर रह गई।
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पार्षद ने निगम सदन में उठाया था मामला
वार्ड तीन के पार्षद जयवीर खटाना ने दो माह पहले हुई निगम सदन की बैठक में घोटाले का मामला उठाया था। उन्होंने आउटडोर विज्ञापन पॉलिसी के तहत शहर में जगह-जगह लगाए यूनिपोल और गैनेट्री का मामला जोरशोर से उठाया। पार्षद का आरोप है कि शहर में अभी पूरी तरह गैनेट्री लगी भी नहीं थीं कि ठेकेदार को करीब 21 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। यह किस आधार पर किया गया, इसकी जानकारी दी जाए। वहीं एक अन्य मामला स्ट्रीट लाइट घोटाले का सामने आया। पार्षद सुरेंद्र कुमार अग्रवाल आरोप है कि उनके वार्ड में एक हजार स्ट्रीट लाइट लगाई जानी थीं, मगर मात्र 355 लाइटें लगी हैं। यह स्थिति पूरे एनआईटी क्षेत्र की है।
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भ्रष्टाचार की खुली पोल फिर भी निगम है मौन:
1. 2018 में निगमायुक्त मोहम्मद शाइन ने प्लानिंग ब्रांच की कुछ फाइलों के गायब होने को लेकर एफआईआर दर्ज कराई थी। इसका भी आजतक कोई पता नहीं।
2. जनवरी 2019 में निगम के ओल्ड फरीदाबाद कार्यालय में डीजल घोटाला सामने आया। पता चला कि कर्मचारी निगम के जनरेटर का डीजल चुराकर खुले बाजार में बेच देते थे। इसमें भी जांच पूरी नहीं हो सकी।
3. जनवरी 2020, महंगाई भत्ता शाखा में कार्यरत एक कर्मचारी द्वारा वकीलों की फीस अपने ही बैंक खाते में ट्रांसफर करने का मामला अभी भी जांच के लिए लंबित है।
4. जनवरी 2020 में पानी के बिल को कम करवाने के एवज में रिश्वत मांगने वाले कर्मचारी को विजिलेंस टीम पकड़ चुकी है।
नगर निगम की वित्तीय शाखा में लगी आग की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। जल्द इस मामले से पर्दा उठेगा। इसके अलावा स्ट्रीट लाइट और विज्ञापन मामले की जांच जारी है। घोटाले संबंधी मामलों में जल्द कार्रवाई की जाएगी।
- यशपाल यादव, नगर निगम आयुक्त
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नगर निगम की वित्तीय शाखा में लगी आग के कारणों का पता लगाया जा रहा है। जांच लंबित है। कमेटी जल्द ही रिपोर्ट सौंपेंगी।
- संजय जून, मंडल आयुक्त