संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। यदि किसी दुर्घटना में किसी को फ्रैक्चर हो जाए तो ऐसे में यदि मरीज बीके अस्पताल आ रहा है तो उसे व उसके तीमारदारों को इस बात की जानकारी होना आवश्यक है कि जिला अस्पताल में मरीजों को केवल प्लास्टर लगाया जाता है। यहां कच्चा या पक्का प्लास्टर लगवाने के लिए मरीजों को स्वयं अपने पैसे खर्च कर बाहर से प्लास्टर का सामान लाना पड़ता है। इसके बाद यहां उपचार किया जाता है।
जिला अस्पताल में रोजाना करीब 150 से 200 लोग दर्द, मोच और फ्रैक्चर की शिकायत लेकर ओपीडी व ओटी में आते हैं। इनमें से करीब 50 लोग कच्चे-पक्के प्लास्टर लगवाने आते हैं। इन मरीजों को 1000 से 1500 रुपये खर्च कर बाहर से सामान लाकर प्लास्टर चढ़वाना पड़ता है। ऐसे में सबसे अधिक परेशानी गरीब तबके से संबंधित लोगों को हो रही है। उक्त स्थिति को देखकर कहा जा सकता है कि गरीब के लिए इस अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचना भी महंगा पड़ रहा है। यहां मोच, दर्द और फ्रैक्चर अलग-अलग स्थितियों में कच्चा-पक्का दो प्रकार का प्लास्टर चढ़ाया जाता है। कच्चा पट्टा 15 दिनों के लिए जबकि पक्का पट्टा 45 दिनों के लिए चढ़ाया जाता है।
मरीजों को होना पड़ता है परेशान
एनआईटी नंबर पांच के निवासी गुरमीत सिंह एक्सीडेंट के बाद फ्रैक्चर चढ़वाने के लिए जिला अस्पताल में पहुंचे, जहां विशेषज्ञों की ओर से उन्हें पक्का प्लास्टर चढ़ाए जाने की बात कही गई। इस पर मरीज गुरमीत के पिता अपार सिंह से प्लास्टर संबंधित सामग्री खत्म होने का हवाला देकर बाहर से लाने को कहा। जिसके बाद गुरमीत के पिता अपार सिंह बाहर से करीब 1200 रुपये सा सामान खरीदकर लाए, जिसके बाद उनके बेटे को पक्का प्लास्टर चढ़ाया गया। इस सामान मेें सॉफ्ट कॉटन, पट्टी प्लास्टर के अलावा अन्य दवाइयां शामिल थीं। पेशे से ड्राइवर पिता अपार सिंह ने बताया कि वह पैसों की कमी के चलते ही वह अपने बेटे को जिला अस्पताल में लेकर पहुंचे थे, लेकिन यहां भी उन्हें आर्थिक रूप से परेशान होते हुए 1200 रुपये का सामान बाहर से खरीदना पड़ा।
सीएमओ को जारी किए निर्देश, जल्द मुहैया करवाई जाएं सुविधाएं
हमारी प्राथमिकता है कि मरीजों को बेहतर और निशुल्क इलाज उपलब्ध हो सके। मरीजों को सामान बाहर से खरीदकर लाना पड़ रहा है। मुझे अभी तक इस बात की जानकारी थी, लेकिन अब जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ विनय गुप्ता को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि इस प्रकार की सुविधाएं अस्पताल में जल्द से जल्द उपलब्ध करवाई जाएं।
डॉ. रणदीप पुनिया, स्वास्थ्य महानिदेशक चंडीगढ़