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एचडीयू-आईसीयू बनकर तैयार, स्टाफ भर्ती का इंतजार

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फरीदाबाद। बीके सिविल अस्पताल में गर्भवतियों के इलाज और जान के खतरे से जूझ रहे मरीजों के इलाज के लिए एचडीयू व आईसीयू बनकर तैयार हो चुका है। हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) और इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में मरीजों के इलाज के लिए विशेष सुविधाएं जैसे प्रत्येक मरीज के लिए मॉनिटर, सिरिंज पंप जैसे मेडिकल उपकरण लगाए गए हैं। हालांकि इन सबका फायदा मरीजों को तभी मिलेगा जब सरकार स्टाफ की नियुक्ति की जाएगी। फौरी तौर पर अस्पताल प्रबंधन इमरजेंसी सेवाएं स्थानीय स्तर पर देने के लिए तैयार है। यदि कोई इमरजेंसी आती है तो प्रशिक्षित स्टाफ को लगाकर सिविल अस्पताल में ही मरीजों को मेडिकल सुविधाएं दी जा सकती हैं।
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हाई रिस्क डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) बनाए जाने की कवायद कई वर्षों से थी। नेशनल हेल्थ मिशन के तहत यह काम किया गया। सरकारी अस्पताल में प्रसव के दौरान होने वाली मौत कम की जा सकेगी। साथ ही महिलाओं का रेफरल रेट भी कम होगा। जिला स्तर पर इसके लिए मांग काफी पहले से की जा रही थी। हाई रिस्क गर्भवती यूनिट को पूरी तरह वातानुकूलित है। इसमें तत्काल ईसीजी, अल्ट्रासाउंड मशीन, पल्स रेट (हृदय गति), रक्त चाप, मधुमेह की तत्काल जानकारी देने वाला मॉनिटर लगे हैं। इसके साथ ही नॉर्मल डिलीवरी रूम (सामान्य प्रसव कक्ष) का जीर्णोद्धार लिए लोक निर्माण विभाग की ओर से किया गया है।
बीते करीब दो माह से अस्पताल में दूसरे वार्ड में प्रसव प्रक्रिया पूरी की जा रही थी। अब इस कक्ष के जीर्णोद्धार से जिला अस्पताल में प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को बदला हुआ माहौल दिखाई देगा। इस कक्ष की दिवार सहित डिलीवरी टेबल को बदला गया है। इस कक्ष में संक्रमण फैलने की संभावना बेहद कम होगी। वहीं, एचआईवी जैसे संक्रमण से ग्रस्त म हिलाओं के प्रसव के लिए अलग से एंटीसेप्टिक कक्ष में तैयार किया गया है।
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इन मामलों की में गर्भवती रेफरेल रेट घटेगा
- दौरे की बीमारी से पीड़ित गर्भवती
- वक्त से पहले डिलीवरी की संभावना वाली गर्भवती
- दिल की बीमारी से जूझ रही गर्भवती
- मधुमेह और रक्तचाप (कम या ज्यादा) की बीमारी से जूझ रही गर्भवती
- अत्यधिक खून की कमी वाली गर्भवती
आंशिक रूप से चल रहा आईसीयू
आईसीयू में आंशिक रूप से ऑपरेशन जारी है। हालांकि पूरी तरह से ऑपरेशन प्रक्रिया संचालित करने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ की आवश्यकता होगी। ऐसे में स्टाफ की नियुक्ति के बाद गंभीर रोगियों को अस्पताल में भर्ती किया जा सकेगा। वहीं, ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में इन दिनों कुल्हा व घुटना प्रत्यारोपण की सुविधा जारी है। इसमें ज्वाइंट लेगामेंट, रोटेटर कफ, जोड़ रिपेयर शामिल है।
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