-किसानों को नहीं मिल रहा मेरी फसल मेरा बोरा पोर्टल का फायदा
- धान की फसल बिक्री में आढ़ती किसानों को लगा रहे चूना, किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
होडल। मुख्यमंत्री जी! मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाने का क्या फायदा, जब किसानों की धान की फसल की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद ही ना हो। यह सवाल क्षेत्र के किसानों का प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सैनी से है, जहां सरकारी खरीद की 22 सितंबर को घोषणा होने के बाद भी खरीद शुरू नहीं हो पाई है। धान की खरीद को लेकर किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा जांच एजेंसियों के अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी कमीशन लेने के बाद फसल खरीद के नाम पर शांत बैठे हुए हैं।
कमीशन देने का आरोप : मुख्यमंत्री नायब सैनी ने 22 सितंबर से किसानों की धान की फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने के आदेश मंडी अधिकारियों को दिए थे। इसके बावजूद मंडी में आढ़तियों व व्यापारियों ने अधिकारियों को कमीशन देने के बाद धान की फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने की बजाय निजी फर्मों से खरीद करवा दी। किसानों में जिले सिंह निवासी भिडूकी, राम सिंह और प्रकाश चंद ने मुख्यमंत्री नायब सैनी के नाम सोशल मीडिया पर शिकायत में कहा कि मंडी में किसानों के साथ धोखाधड़ी की जा रही है। सूखी धान की फसल को 1600 रुपये से 2100 रुपये में निजी एजेंसी खरीद कर रही है। इसी धान की फसल को चावल मिल संचालक आढ़ती किसानों के नाम पर पोर्टल के माध्यम से सरकारी रेट पर बिक्री कर सरकार व किसानों को चूना लगा रहे हैं।
किसानों के नाम के गेटपास दर्ज नहीं : उन्होंने कहा कि पोर्टल पर किसानों के नाम के गेटपास दर्ज नहीं हैं। किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों व जांच एजेंसियों के अधिकारियों पर कमीशन लेने के बाद कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाते हुए धान की खरीद मामले की उच्चतम न्यायालय के जज से जांच करवाने की मांग की है। किसानों ने बताया कि वर्ष 2022 में अनाज मंडी में धान की खरीद में बीस हजार क्विंटल का घोटाला किया गया था, जिसमें मंडी सचिव सहित अभिलेखक का नाम केस में दर्ज हुआ था। लेकिन कुछ दिन बाद दोनों अधिकारी होडल अनाज मंडी में तबादला करवा कर वापस आ गए और लगातार किसानों के साथ खरीद के नाम पर धोखाधड़ी करने में लगे हुए हैं।
इस मामले में शिकायत नहीं मिली है। मैंने सोशल मीडिया के अलावा विभिन्न प्लेटफॉर्म पर किसानों को शिकायत करने के लिए विकल्प दिया हुआ है। किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ, जिला उपायुक्त, पलवल