संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शहर भर में गोवर्धन पूजा बड़ी धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ की गई। पूजन का समय सायं 6 बजे से आरंभ हुआ और कुछ लोगों ने अपनी सुविधानुसार भगवान गोवर्धन का पूजन किया। इससे पूर्व महिलाओं ने सुबह से ही गोबर इकट्ठा करना शुरू कर दिया और किसी ने अलग तो किसी ने एक जगह मिलकर गोवर्धन की पूजा की। शहरी क्षेत्र में लोगों ने अपने घरों में गोवर्धन भगवान बनाए। गांवों में सामूहिक रूप से बड़े आकार के सुंदर गोवर्धन बनाए गए।
उदया तिथि को देखते हुए गोवर्धन पूजा दिवाली के बाद एक दिन छोड़कर यानि 14 नवंबर को मनाई गई। गोवर्धन पूजा के दिन भगवान श्री कृष्ण और गौ माता की पूजा का विधान है। वैसे शहर में कुछ लोगों ने सोमवार को भी गोवर्धन पूजा कर ली था, लेकिन अधिकतर स्थानों पर मंगलवार के दिन पूजा की गई। बड़खल निवासी लक्ष्मण गौड़ ने बताया कि उनकी पुत्रवधू अनीता, अन्नु एवं सभी बच्चे मिलकर हर वर्ष सुंदर गोवर्धन बनाते हैं। खील, बतासों, लेस से एवं फूलों से गोवर्धन को सजाया जाता है। इस बार भी उन्होंने विशेष तैयारी की है। शहरों एवं सेक्टरों में लोगों ने छोटे-छोटे गोवर्धन महाराज बनाए, क्योंकि इन जगहों पर एक तो गोबर उपलब्ध नहीं हो पाता, दूसरा जगह का भी अभाव होता है। सैनिक कॉलोनी निवासी अशोक शर्मा ने बताया कि उनके परिजनों ने छोटा-सा गोवर्धन बनाया है और भगवान को 56 भोग लगाए हैं।
गांवों से खरीदा गोबर
शहर से लगते गांवों में महिलाएं बेचने के लिए गोबर इकट्ठा कर लेती हैं। जिसे शहर के लोग खरीदकर ले जाते हैं। हालांकि कुछ लोगों ने तो गोबर वैसे ही दे दिया, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी रहे जिन्होंने गोवर्धन के लिए गोबर इकट्ठा किया हुआ था और आज 10 रुपए किलो तक उन्हाेंने गोबर बेचा।
अलग-अलग धार्मिक संस्थाओं ने की सामूहिक पूजा
एक नंबर स्थित सिद्धपीठ श्री हनुमान मंदिर, पावन सिद्धपीठ श्री हनुमान मंदिर 1 बी-ब्लॉक, एसजीएम नगर स्थित शिव मंदिर आदि में सामूहिक रूप से गोवर्धन महाराज की पूजा धूमधाम से की गई। मोहना में धरने पर बैठी महिलाओं ने धरना स्थल पर गोवर्धन भगवान की प्रतिमा बनाकर पूजन किया और समाज में सुख-समृद्धि की कामना की गई।
पूजा का महत्व
इंद्र भगवान अपनी पूजा करवाना चाहते थे। भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र का मान मर्दन करने के लिए गोवर्धन महाराज की पूजा करवाई और ब्रजवासियों की इंद्र के प्रकोप से रक्षा करते हुए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा लिया था। बृजवासियों ने तभी से गोवर्धन महाराज की पूजा आरंभ कर दी। विशेषकर बृज क्षेत्र में गोवर्धन पूजा का बहुत महत्व है। पूजा का सही समय सायं 6 बजे है।
- पं राकेश तिवारी, सिद्धपीठ काली मंदिर, एनआईटी बस अड्डा