आर्थिक अपराध शाखा की जांच के बाद केस दर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। कम समय में अधिक मुनाफे का लालच देकर एक कंपनी ने 10 से 15 हजार से ज्यादा लोगों से करोड़ों रुपये ठग लिए। मोटी रकम ऐंठने के बाद कंपनी फरार हो गई। कंपनी ने शहर में अपने कर्मचारी छोड़ रखे हैं। ये लोगों को बातों के जाल में फंसा कर कंपनी से जोड़ते हैं। कंपनी ने दैनिक, छमाही व एक साल तक पैसे निवेश करने के बाद भारी मुनाफे के साथ पैसे वापस करने की स्कीम बना रखी थी। कंपनी 10 से 15 हजार लोगों से करीब 15 करोड़ रुपये लेकर फरार हो गई है। आर्थिक अपराध शाखा की शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है।
सरस्वती कॉलोनी निवासी ओमप्रकाश ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह अपने एक जानकार कन्हैया लाल के साथ ट्रिंटी मल्टी स्टेट कॉपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड नाम की कंपनी से जुड़े थे। कंपनी का कार्यालय सेक्टर-31 थाना इलाके के चौधरी कॉम्प्लैक्स बंगाल सूटिंग में बना हुआ है। कंपनी को रामकेश शर्मा, उनका बेटा अरुण शर्मा, मनोज शर्म, अंगद शाही और रवि त्रिपाठी चला रहे थे। कन्हैया ने खुद को कंपनी का शाखा प्रबंधक बताया और कहा कि कंपनी कम समय में अधिक लाभ देती है। आरोपी ने इसे भारत सरकार से मान्यता प्राप्त होने का दावा भी किया। निवेश के बदले बैंकों से अधिक लाभ दिलाने और बीमा करने का वादा किया। कन्हैया की बातों में आकर ओमप्रकाश कंपनी से जुड़ गए और पैसे निवेश करने शुरू कर दिए। एक साल तक कंपनी ने तय समय पर पैसे दिए। 2020 में लॉकडाउन में कंपनी ने पैसे देने बंद कर दिए। आरोपियों ने निवेशकों के फोन उठाने भी बंद कर दिए। पैसा न मिलने के कारण ओमप्रकाश ने अप्रैल 2021 से काम करना बंद कर दिया। इनके बाद आरोपियों ने ओमप्रकाश को कई बार लखनऊ बुलाया। पैसे देने की बजाय आरोपी हर बार एक नई तारीख तय कर देते थे। इसके बाद आरोपियों ने उसे मारने की धमकी देनी शुरू कर दी।
दो और थानों में दर्ज हुए कंपनी के खिलाफ केस
कंपनी के खिलाफ पल्ला के आदर्श नगर निवासी जगत सिंह ने केस दर्ज कराया। अधिक लाभ का लालच देकर कंपनी ने जगत सिंह से एक लाख रुपये जमा कराए। मोटे मुनाफे के लिए जगत सिंह ने परिवार के सदस्य व रिश्तेदारों को भी अपने साथ जोड़ लिया।सभी ने कंपनी में रुपये जमा कराने शुरू कर दिए। आरोप है कि तय समय के अनुसार जगत सिंह को ना तो पूंजी मिली ना ही लाभ। इधर अमर नगर निवासी सुनील कुमार के साथ भी कंपनी ने ठगी की। सुनील कंपनी में कन्हैया लाल के माध्यम से जुड़े थे। सुनील ने कन्हैया की बातों में आकर अपने परिवार के सभी लोगों को जोड़ कर पैसे जमा कराए। आर्थिक अपराध शाखा की शुरूआती जांच के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।