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पहले कोरोना अब आर्थिक तंगी की मार से जूझ रहे खोरी वासी

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फरीदाबाद। अरावली वन क्षेत्र में बसे गांव खोरी में डर के साए में जी रहे लोग अब आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कोरोना महामारी में काम-धंधा चौपट होने के साथ ही अनेक लोगों की नौकरी चली गई। वहीं रहने के लिए एक मकान बचा था। वह भी छिन रहा है। ऐसे में उनके सामने रोजी-रोटी सहित आसरे का भी संकट खड़ा हो गया है। इससे लोग बेहद परेशान हैं।
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दिल्ली-हरियाणा सीमा पर बसे गांव खोरी में करीब 10 हजार परिवार निवास करते हैं। यहां ज्यादातर मजदूर तबके के लोग है, महिलाएं कोठियों में काम करती है। कुछ लोग मजदूरी करते हैं, तो कुछ दिल्ली में नौकरी करके अपना जीवन यापन करते हैं। एक-एक रुपये जोड़कर वर्षों पहले लोगों ने भूमाफिया के बहकावे में आकर लाखों रुपये की जमीन ली। किसी तरह रहने के लिए घर बनाया।
अरावली वन क्षेत्र की जमीन पर बसे खोरी में पिछले माह सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार और जिला प्रशासन को तोड़फोड़ कर छह हफ्तों में जगह खाली करवाने के आदेश दिए। इस कारण लोग डर और सहमे हुए हैं। प्रशासन की अपील पर कई लोग घरों को स्वयं खाली करके जा रहे हैं, तो कुछ लोग अभी भी अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
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रविवार को सरदार कॉलोनी निवासी महिला श्यामा देवी और फूलवती ने बताया कि उनके पास खोने के लिए अब कुछ नहीं बचा है। वह कोठियों में काम करती थी। कोरोना के डर से उन्हें पिछले साल नौकरी से निकाल दिया। पति रेहड़ी चलाते हैं। लॉकडाउन के कारण वह काम भी चौपट हो गया। रहने के लिए एक घर था। वह भी प्रशासन ने तोड़ दिया। पांच बच्चे हैं, अब जाएं तो कहां जाए। स्थिति यह हो गई है कि खाने के लिए पैसे नहीं है। दिल्ली में महंगे रेट पर कमरा मिल रहा है। वहां भी पहले एडवांस मांगते हैं। इसलिए वह यहां से कहीं नहीं जाएंगी। अपनी जमीन पर झुग्गी डाल कर रहेगी।
लोगों से बातचीत
शादी के बाद यहां रहने आई थी। कभी ऐसा दिन देखने को नहीं मिला, जो अब देखने को मिल रहा है। कोठी में साफ-सफाई का काम करती हूं। कोरोना के डर से वहां से भी काम से निकाल दिया। अब भूखे मरने की नौबत आ गई है। - कांता देवी, खोरी निवासी
खोरी में तोड़फोड़ की बात सुनकर दिल्ली क्षेत्र में मकानों का किराया काफी बढ़ा दिया गया है। एक महीने पहले जो कमरा 2500 रुपये में मिल रहा था। अब चार हजार में मिल रहा है। खाने के लिए पैसे नहीं हैं। इतना महंगा कमरा कैसे लें। इसलिए अपनी जमीन पर ही रहेंगे। - ललिता देवी, खोरी निवासी
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