दर्द और अकेलेपन के बावजूद जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ा और हर दिन खुद को मजबूत बनाए रखा
निधि कुशवाहा
फरीदाबाद। कहते हैं मां की जगह कोई नहीं ले सकता लेकिन कुछ पिता हालात के सामने हार मानने के बजाय जिम्मेदारियों को मजबूती से संभाल लेते हैं। जब परिस्थितियां बदलती हैं और बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी अकेले पिता पर आ जाती है, तो वे धीरे-धीरे अपनी पूरी दिनचर्या बच्चों के हिसाब से ढाल लेते हैं।
मुश्किल हालात में भी इन पिताओं ने हार नहीं मानी और अपने बच्चों के लिए लगातार आगे बढ़ते रहे। दर्द और अकेलेपन के बावजूद उन्होंने जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ा और हर दिन खुद को मजबूत बनाए रखा।
पहले लगता था मैं यह सब नहीं कर पाऊंगा, लेकिन बेटी के लिए हर दिन कुछ नया सीखना पड़ा। अब वही मेरी ताकत है। - अभिनव शर्मा
लोगों ने कई बार कहा कि दूसरी शादी कर लो, लेकिन मुझे बस इतना चाहिए था कि मेरे बच्चे सुरक्षित और खुश रहें। - सुमित
घर आकर बच्चों का चेहरा देखता हूं तो सारी थकान खत्म हो जाती है। अब मेरी पूरी दुनिया वही हैं। - विवेक
बेटी के बड़े होने के साथ उसके हर सवाल, हर भाव को समझना मेरे लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन गई। - निशांत मिश्रा