बंधवाड़ी कचरा विवाद पर विराम की तैयारी, अप्रैल 2026 से फरीदाबाद संभालेगा अपना कचरा
निगम की तरफ से तत्काल का एक्शन प्लान भी है तैयार, अभी बंधवाड़ी में ही लगाएगी अपनी यूनिट
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के सख्त निर्देशों के बाद अगले दो महीनों में जगह चिन्हित करनी होगी
बंधवाड़ी लैंडफिल साइट फरीदाबाद और गुरुग्राम दोनों के लिए तनाव और प्रदूषण का बड़ा कारण बना हुआ है
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। फरीदाबाद और गुरुग्राम के बीच वर्षों से चले आ रहे बंधवाड़ी लैंडफिल से जुड़े कचरा विवाद के समाधान की दिशा में निर्णायक कदम उठ गया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के सख्त निर्देशों के बाद अब फरीदाबाद को अपने कचरे के निस्तारण के लिए गुरुग्राम पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
आयोग ने नगर निगम फरीदाबाद को आदेश दिए हैं कि वह अगले दो महीनों में जमीन चिन्हित करें और अप्रैल 2026 तक अपने स्वयं के विकेंद्रीकृत वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम को पूरी तरह लागू करे। वहीं निगम की तरफ से इस दिशा में तुरंत एक्शन लेते हुए फिलहाल बंधवाड़ी में ही अपना ज्वाइंट प्लांट लगाने का काम किया जाएगा। इसके बाद तुरंत जगह फाइनल होते ही आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस फैसले से शहर के पर्यावरण, हवा की गुणवत्ता और नागरिकों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। लंबे समय से बंधवाड़ी लैंडफिल साइट फरीदाबाद और गुरुग्राम दोनों के लिए तनाव और प्रदूषण का बड़ा कारण बना हुआ है।
बंधवाड़ी लैंडफिल साइट पर जाता है फरीदाबाद का कचरा
गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड पर स्थित बंधवाड़ी लैंडफिल साइट पर वर्तमान में फरीदाबाद का करीब 900 से 1,000 टन प्रतिदिन कचरा डाला जा रहा है। वर्षों से गुरुग्राम और फरीदाबाद का संयुक्त कचरा यहां जमा होने से यह स्थल अब कचरे के पहाड़ में तब्दील हो चुका है, जिसकी ऊंचाई लगभग 40 मीटर तक पहुंच गई थी। वहीं निगम की तरफ से किए जा रहे प्रयासों के बाद इस कूड़े के पहाड़ में काफी हद तक कमी आई है लेकिन अभी तक इस समस्या का कोई स्थाई समाधान नहीं निकल पाया है।
वहीं स्थानीय लोगों और पर्यावरण संगठनों का आरोप है कि इस लैंडफिल साइट से निकलने वाला जहरीला लीचेट अरावली क्षेत्र के भूजल को प्रदूषित कर रहा है। आसपास के गांवों में त्वचा रोग और सांस संबंधी बीमारियों का डर बना रहता है।
आग और जहरीला धुआं बनी बड़ी समस्या
बंधवाड़ी लैंडफिल साइट पर कई बार कूड़े में आग लगने की बात भी सामने आई है। यहां लगने वाली आग इस पूरे विवाद का सबसे गंभीर पहलू रही है। गर्मी और सर्दी दोनों मौसमों में कचरे में आग लगने से जहरीला धुआं निकलता है जो गुरुग्राम और फरीदाबाद की हवा को दमघोंटू बना देता है। कई बार एयर क्वालिटी इंडेक्स भी इसके कारण खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है।
सीएक्यूएम के निर्देश- आत्मनिर्भर बने फरीदाबाद
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने अपने हालिया आदेशों में साफ कहा है कि नगर निगम फरीदाबाद को विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन प्रणाली अपनानी होगी। इसके तहत शहर का कचरा अब दूसरे जिले में भेजने के बजाय शहर के भीतर ही प्रोसेस किया जाएगा।
आयोग के निर्देशों के अनुसार नगर निगम को कई पहलुओं पर काम करना होगा ।
अलग-अलग वार्डों में माइक्रो वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करनी होंगी।
खाद बनाने के छोटे केंद्र और मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी विकसित करनी होंगी।
हाउसिंग सोसाइटियों और बड़े संस्थानों को जीरो वेस्ट मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित करना होगा।
नए लैंडफिल के लिए तीन जगहों पर विचार
शहर में बढ़ते कचरे की समस्या को देखते हुए फरीदाबाद नगर निगम ने नए लैंडफिल और प्रोसेसिंग प्लांट के लिए तीन स्थानों को चिन्हित किया है। इनमें डबुआ, मोटूका और सोताही शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार इन तीनों स्थानों का तकनीकी और पर्यावरणीय मूल्यांकन किया जा रहा है। आबादी से दूरी, भविष्य की जरूरतें और पर्यावरणीय मानकों के आधार पर इनमें से एक स्थान का अंतिम चयन किया जाएगा। चयन के बाद यहां आधुनिक लैंडफिल और कचरा निस्तारण की व्यवस्था विकसित की जाएगी ताकि फरीदाबाद का कचरा यहीं पर वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस हो सके।
निगम आयुक्त के निर्देश पर तैयार हुआ है एक्शन प्लान
आपको बताते चलें कि लैंडफिल का मुद्दा काफी समय से चल रहा है। इसको लेकर निगम आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा के निर्देश के बाद अब निगम की टीम बंधवाड़ी में ही ज्वाइंट प्लांट लगाने का काम करेगी। वहीं निगम की तरफ से फरीदाबाद में जगह का चयन किया जा रहा है। इससे जल्द ही अपना प्लांट भी बना दिया जाएगा।
अभी बंधवाड़ी में ज्वाइंट प्लांट लगाकर इस समस्या का समाधान कर दिया जाएगा। वहीं फरीदाबाद में प्लांट लगाने का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। - निगम आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा