सिंहराज की ड्यूटी अस्पताल में रात के समय होती थी। ऐसे में उसके पास ज्यादा काम नहीं होता था। वह ड्यूटी के बाद भी अस्पताल के आसपास ही घूमता रहता था। अस्पताल के आसपास खोखे लगाने वालों का कहना है कि शक्ल से कभी भी सिंहराज पर किसी को शक नहीं हुआ। वह लोगों से घुल मिल गया था।
मृत किशोरी में से एक अपने भाई के साथ अस्पताल के पास ही चाय की रेहड़ी लगाती थी। उसके माता पिता का देहांत हो चुका है। आरोपी चाय पीने के बहाने रेहड़ी के आसपास ही घूमता रहता था। किशोरी के भाई को उसकी हरकत से कई बार नाराजगी भी हुई। उसे नहीं पता था कि वह इतनी बड़ी वारदात भी कर देगा। दूसरी किशोरी भी अस्पताल के पास ही बने मकानों में रहती थी। तीसरी किशोरी उसके यहां साफ-सफाई का काम करने आई थी।
आरोपी के घर से गायब हैं परिवार के सदस्य
आरोपी सिंहराज की हरकत के बाद उसके परिवार को अपनी सुरक्षा का भय सता रहा है। गांव में आरोपी सिंहराज के प्रति लोगों में बेहद गुस्सा है। आरोपी के परिवार का हुक्का-पानी पहले से ही बंद है। ऐसे में आरोपी के परिवार के ज्यादातर सदस्य गांव से बाहर अपनी रिश्तेदारियों में चले गए हैं। आरोपी तीन भाई हैं। सभी गांव जसाना में ही परिवार के साथ रहते हैं। आरोपी की हरकत की चर्चा आसपास के गांव में भी है।