आरोपी ने अस्पताल में साफ-सफाई के लिए आने वाली सहायिका के साथ गार्ड रूम में ही दुष्कर्म किया था। उसकी हत्या के बाद सहायिका की सहेली के साथ भी आरोपी ने गार्ड रूम में ही दुष्कर्म किया। सभी को हत्या के बाद वह एक ही जगह पर फेंक देता था। उम्र ज्यादा होने के कारण उस पर कभी किसी को शक नहीं हुआ। पुलिस ने हॉस्पिटल के स्टाफ से भी उसके बारे में पूछताछ की है। इसके साथ ही गार्ड को जिस एजेंसी के माध्यम से नौकरी पर रखा गया था। उसके खिलाफ भी जांच शुरू कर दी गई है।
आरोपी के परिवार का है हुक्का पानी बंद
आरोपी सिंहराज तीन भाई हैं और दो बेटे हैं। साल 1986 में चाचा-भतीजे की हत्या के बाद से आरोपी के परिवार का गांव में हुक्का पानी बंद है। ग्रामीण कहते हैं कि आरोपी ने चाचा-भतीजे की हत्या के दौरान उनका सिर काट दिया था। तभी से इनके परिवार को मुंडकटे कहा जाने लगा। आरोपियों के परिवार से गांव के लोग संबंध नहीं रखते। आरोपियों को शादी समारोह में भी नहीं बुलाया जाता है।
पुलिस जांच पर भी उठते हैं सवाल
कई हत्याओं के बाद भी आरोपी ने खुद ही फोन करके अपना जुर्म स्वीकार किया है। ऐसे में यदि इस बार भी शव पानी में बह जाता तो शायद ये मामला भी फाइल में ही दबकर रह जाता। सभी मामलों में केवल गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज है। छात्रा हत्या मामले में भी केस गुमशुदगी का ही दर्ज किया गया था। आरोपी के मुताबिक, उसने 2 जनवरी को छात्रा की हत्या कर दी थी। चार दिन तक शव झाड़ियों में पड़ा रहा, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। 1 जनवरी को शिकायत दर्ज होने के बाद भी पुलिस आरोपी को फोन करके बुलाती रही। अंदेशा है कि पुलिस का फोन जाने के बाद आरोपी घबरा गया और घटना को अंजाम दे दिया। बाकी तीन हत्याओं में पुलिस के लिए सुबूत जुटाना इतना आसान नहीं है। तीनों में से एक भी शव पुलिस बरामद नहीं कर पाई है। सभी साक्ष्य खत्म हो चुके हैं। ऐसे में केवल आरोपी के बयान के आधार पर उसे अदालत में दोषी साबित करना आसान नहीं होगा।