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Faridabad News: मास्टर ड्रेनेज योजना की राह में चुनौती बन रहा अरावली के प्राकृतिक नालों पर हुआ अतिक्रमण

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चेक डैम और ड्रोन सर्वे से समाधान की तैयारी, वर्षों से बंद पड़े जल मार्गों के कारण हर मानसून में जलभराव झेल रहे अरावली से सटे गांव
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। मानसून के दौरान जलभराव से राहत दिलाने के लिए एफएमडीए मास्टर ड्रेनेज योजना के तहत बुढ़िया नाले का ड्रोन सर्वे कर चेक डैम बनाने की तैयारी कर रहा है लेकिन इस पूरी योजना के सामने अरावली के प्राकृतिक नालों पर वर्षों से हो रहे अतिक्रमण सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। विशेषज्ञों और ग्रामीणों का कहना है कि जब तक प्राकृतिक जल मार्गों को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया जाएगा तब तक केवल नई परियोजनाओं से स्थायी समाधान मिलना मुश्किल होगा।

अरावली की पहाड़ियों से निकलने वाले प्राकृतिक नाले कभी अनंगपुर बांध, सूरजकुंड, बड़खल झील और यमुना की ओर पानी पहुंचाने का प्राकृतिक माध्यम थे। लेकिन पिछले एक दशक में कई जल मार्गों पर अवैध निर्माण और मिट्टी भराव होने से पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया है। इसका असर अब हर मानसून में साफ दिखाई देता है।
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अरावली से सटे कई गांव हर साल झेलते हैं जलभराव

अनंगपुर, लकड़पुर, मांगर, पाली और अरावली की तलहटी में बसे अन्य गांवों में बारिश के दौरान गलियों, खेतों और कई घरों तक पानी भर जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है हजारों की आबादी हर साल इस समस्या से प्रभावित होती है। कई स्थानों पर पानी की निकासी नहीं होने से दिनों तक जलभराव बना रहता है जिससे आवागमन, खेती और दैनिक जीवन प्रभावित होता है।

कई एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि प्राकृतिक नालों के आसपास कई एकड़ सरकारी भूमि पर भी अतिक्रमण हो चुका है। इन कब्जों के कारण कई पुराने जलमार्ग पूरी तरह संकरे हो गए हैं या उनका अस्तित्व ही खत्म हो गया है। लोगों का कहना है कि इस संबंध में कई बार जिला प्रशासन, नगर निगम, वन विभाग और अन्य एजेंसियों को शिकायत दी गई, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

अब वैज्ञानिक तरीके से बनेगी ड्रेनेज योजना

इसी बीच एफएमडीए ने बुढ़िया नाले को मास्टर ड्रेनेज योजना में शामिल करते हुए लिडार यूएवी ड्रोन से सर्वे कराने का निर्णय लिया है। करीब तीन वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में होने वाले इस सर्वे से जमीन की ढलान, पानी के प्रवाह और नाले की वास्तविक स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके आधार पर चेक डैम, जल निकासी और वर्षा जल संचयन की विस्तृत योजना बनाई जाएगी। डिजाइन का सत्यापन आईआईटी, जेएमआई या एनआईटी कुरुक्षेत्र जैसे संस्थानों से कराया जाएगा।

अतिक्रमण हटे बिना अधूरा रहेगा समाधान
जल संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि चेक डैम और आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम निश्चित रूप से राहत देंगे लेकिन यदि प्राकृतिक नालों पर हुए अतिक्रमण नहीं हटाए गए तो बारिश का पानी फिर भी अपने मूल मार्ग तक नहीं पहुंच पाएगा। उनका कहना है कि मास्टर ड्रेनेज योजना के साथ-साथ प्राकृतिक जल मार्गों की

यह बात पूरी तरह सही है कि प्राकृतिक नालों पर कब्जा हो चुका है। इससे ग्रामीण बहुत परेशान हैं क्योंकि मानसून में पूरा गांव डूब जाता है। मेरी लोगों से भी अपील है कि वे खुद ही कब्जे हटा लें ताकि पानी का प्राकृतिक बहाव न रुके।-वीरेंद्र भडाना, पार्षद अनंगपुर
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अनंगपुर के रकबे में कुछ हिस्सा वन क्षेत्र में आता है तो कुछ नहीं। नालों पर अतिक्रमण है। हम समय-समय पर अरावली में अवैध निर्माण गिराते हैं और मामले भी दर्ज कराए गए हैं।- झलकार उयाके, वन मंडल अधिकारी
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