फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Faridabad News: एनआईटी के सीवेज डिस्पोजल होंगे हाईटेक, स्काडा सिस्टम से होगी निगरानी

विज्ञापन
विज्ञापन
पर्वतीय कॉलोनी, सोहना रोड और 60 फीट रोड डिस्पोजल का होगा संचालन
विज्ञापन

डिजिटल निगरानी से सीवेज ओवरफ्लो और जलभराव की समस्या कम करने पर रहेगा फोकस

अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। एनआईटी क्षेत्र में लंबे समय से बनी सीवेज ओवरफ्लो और जलभराव की समस्या के समाधान की दिशा में नगर निगम ने नई पहल शुरू की है। पर्वतीय कॉलोनी डिस्पोजल, सोहना रोड डिस्पोजल और 60 फीट रोड एंड डिस्पोजल के संचालन एवं रखरखाव को आधुनिक स्काडा आधारित प्रणाली से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस परियोजना के तहत डिस्पोजल पंपिंग स्टेशनों की डिजिटल निगरानी होगी जिससे खराबी की जानकारी तुरंत मिलने और समय पर कार्रवाई होने की उम्मीद है।

एनआईटी फरीदाबाद के कई हिस्सों में बरसात के दौरान जलभराव और सीवेज ओवरफ्लो लंबे समय से बड़ी समस्या रहे हैं। विशेष रूप से पर्वतीय कॉलोनी, सोहना रोड, 60 फीट रोड और आसपास की कॉलोनियों में हल्की बारिश के बाद भी सड़कों पर गंदा पानी जमा होने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। इससे लोगों की आवाजाही प्रभावित होने के साथ व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं। कई बार सीवर ओवरफ्लो के कारण घरों और दुकानों तक गंदा पानी पहुंचने की स्थिति भी बनती रही है।
विज्ञापन


नगर निगम को हर मानसून में इन इलाकों से बड़ी संख्या में शिकायतें मिलती रही हैं। ऐसे में डिस्पोजल प्रणाली को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने का निर्णय लिया गया है, ताकि समस्या का केवल अस्थायी नहीं बल्कि व्यवस्थित समाधान किया जा सके।

डिजिटल निगरानी से बदलेगी संचालन व्यवस्था

परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा स्काडा आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम है। अभी तक अधिकांश डिस्पोजल स्टेशनों की निगरानी मैन्युअल तरीके से होती रही है। मोटर बंद होने, बिजली आपूर्ति बाधित होने या पंपिंग क्षमता कम होने जैसी जानकारी कई बार देर से मिलती थी, जिससे जलभराव की स्थिति गंभीर हो जाती थी।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद कंट्रोल सिस्टम के माध्यम से पंपों की कार्यस्थिति, जलस्तर, मोटर संचालन और तकनीकी खराबी की जानकारी वास्तविक समय (रियल टाइम) में उपलब्ध होगी। इससे खराबी का पता जल्दी लग सकेगा और मरम्मत या संचालन संबंधी कार्रवाई में देरी कम होने की संभावना है।

240 दिनों में पूरा करना होगा काम
जानकारी के अनुसार कार्य पूरा करने के लिए 240 दिनों की अवधि तय की गई है। इसके अलावा संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी दो वर्ष तक रहेगी, ताकि प्रणाली के नियमित संचालन और निगरानी की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जा सके। नगर निगम के अधिकारियों का मानना है कि केवल नई तकनीक स्थापित करना पर्याप्त नहीं होगा बल्कि उसका नियमित संचालन और रखरखाव भी उतना ही महत्वपूर्ण रहेगा। इसी कारण परियोजना में ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस को भी शामिल किया गया है।

मानसून प्रबंधन में मिलेगी मदद
फरीदाबाद में पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारी बारिश के समय कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी है। नगर निगम और जिला प्रशासन मानसून से पहले नालों की सफाई, पंपिंग स्टेशनों की मरम्मत और स्टॉर्म वाटर सिस्टम को दुरुस्त करने पर लगातार काम कर रहे हैं। इसी शृंखला में एनआईटी क्षेत्र के प्रमुख डिस्पोजल प्वाइंट को डिजिटल मॉनिटरिंग से जोड़ने की योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विज्ञापन

निगम की तरफ से कई नई तकनीकों को अपनाकर काम किया जा रहा है ताकि लोगों को जमीनी स्तर पर अधिक से अधिक लाभ पहुंचाया जा सके। - धीरेंद्र खड़गटा, निगम आयुक्त
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें