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Faridabad News: एनआईटी की खूबसूरती को लगा अतिक्रमण का ग्रहण

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बंटवारे के बाद आए विस्थापितों के लिए तैयार की गई थी न्यू इंडस्ट्रियल टाउनशिप
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77 साल में बदल गई तस्वीर, बंगलों की जगह खड़े हुए चार मंजिला फ्लैट
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। देश के विभाजन के बाद पाकिस्तान से आए हजारों परिवारों को नया आशियाना देने के लिए बसाई गई न्यू इंडस्ट्रियल टाउनशिप (एनआईटी) 77 वर्ष की हो गई है । 17 अक्तूबर 1949 को जिस एनआईटी की नींव विस्थापितों के पुनर्वास और सुनियोजित शहर के सपने के साथ रखी गई थी, उसकी तस्वीर अब काफी बदल चुकी है। खूबसूरत बंगलों, चौड़ी सड़कों और व्यवस्थित गलियों के लिए पहचाने जाने वाले एनआईटी-एक, दो, तीन और पांच में अब अतिक्रमण, व्यावसायिक गतिविधियों और बहुमंजिला निर्माण का विस्तार हो चुका है।

वर्ष 1947 में देश के विभाजन के दौरान पश्चिमी पंजाब और उत्तर-पश्चिमी सीमांत प्रांत से बड़ी संख्या में हिंदू और सिख परिवार अपना घर-बार छोड़कर भारत पहुंचे थे। इनमें बन्नू, कोहाट, पेशावर, मर्दान और डेरा इस्माइल खान जैसे क्षेत्रों से आए परिवार भी शामिल थे। विस्थापित परिवारों को स्थायी रूप से बसाने के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने फरीदाबाद में नई टाउनशिप विकसित करने की योजना बनाई। एनआईटी की नींव रखी गई। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस परियोजना में विशेष रुचि ली।
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फरीदाबाद विकास बोर्ड के माध्यम से शहर को विकसित करने की योजना तैयार की गई। बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे, जो बाद में देश के पहले राष्ट्रपति बने। उस समय एनआईटी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आबादी नहीं थी। विस्थापित परिवारों को यहां बसाने के लिए मकान और रहने की दूसरी सुविधाएं विकसित की गईं। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, करीब 5196 मकान बनाने की योजना थी। लगभग 233 वर्ग गज के प्लॉट पर मकान तैयार किए गए। इन परिवारों ने सरकारी सहायता के साथ अपने श्रम से भी शहर को बसाने में अहम भूमिका निभाई। धीरे-धीरे एनआईटी-एक, दो, तीन और पांच के रूप में यह क्षेत्र विकसित हुआ।
बंगलों की खूबसूरती थी एनआईटी की पहचान

एनआईटी के शुरुआती दौर में यहां बनाए गए ‘निशन हट'' मकान और बंगले शहर की पहचान हुआ करते थे। खुले परिसर, हरियाली और व्यवस्थित बसावट के कारण यह क्षेत्र लोगों को आकर्षित करता था। यहां के बंगले केवल रहने के लिए मकान नहीं, बल्कि उस दौर की सुनियोजित शहरी बसावट की मिसाल भी थे। आज एनआईटी-एक का बाजार फरीदाबाद के प्रमुख बाजारों में शामिल है।
बंगलों की जगह चार मंजिला फ्लैट
पिछले कुछ वर्षों में एनआईटी के पुराने आवासीय स्वरूप में तेजी से बदलाव आया है। एनआईटी-एक, दो, तीन और पांच में कई पुराने बंगलों को तोड़कर उनकी जगह व्यावसायिक इमारतें बनाई जा चुकी हैं। इनमें बैंक, नर्सिंग होम और दूसरी व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। आवासीय गलियों में भी दुकानें खुल गई हैं। अब पुराने मकानों को तोड़कर उनकी जगह फ्लैट बनाने का चलन बढ़ा है। कई स्थानों पर चार मंजिला इमारतें खड़ी की जा रही हैं और फ्लैट बनाकर बेचे जा रहे हैं। इससे क्षेत्र में रहने वाले लोगों की संख्या और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। हालांकि, इस बदलाव के साथ पार्किंग, यातायात, गलियों में भीड़ और मूल आवासीय स्वरूप को लेकर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। एनआईटी की पहचान केवल बंगलों और बाजार तक सीमित नहीं रही है। यहां का दशहरा मैदान भी लंबे समय से सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।


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एनआईटी की आबादी बढ़ चुकी है इस वजह से इसके स्वरूप में बदलाव आ गया है अब पुराने घरों को तोड़कर फ्लैट बनाए जा रहे हैं । घरों में दुकानें खोली जा रही हैं। अब बड़ी आबादी सेक्टर और सोसाइटियों में जा चुकी है।- रवि भूषण खत्री, उद्योगपति
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देश के बंटवारे के बाद विस्थापित हुए लोगों ने यहां के औद्योगिक विकास से लेकर सांस्कृतिक विकास में बड़ी भूमिका निभाई है इनकी मेहनत की बदौलत यह शहर में बड़े -बड़े उद्योग स्थापित हो सके।- श्याम सुंदर कपूर, उद्योगपति
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