फरीदाबाद/बल्लभगढ़। कोरोना के साये में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने शुक्रवार को ईद-उल-फितर घरों में नमाज अता कर मनाई। इमामों ने लोगों को कोरोना से बचाने की खास दुआ की। मस्जिदों के आगे पुलिस का पहरा रहा, ताकि भीड़ इकट्ठी न हो। अधिकतर लोगों ने फोन पर या आनलाइन एक दूसरे को मुबारकबाद दी। जो लोग घरों से बाहर निकले उन्होंने कोविड नियमों का ख्याल रखा। मस्जिदों में इमाम और मस्जिद के सदस्यों ने इबादत की। इसके चलते हर बार खचाखच भरे दिखने वाले मस्जिद परिसर सून नजर आ रहे थे। उधर, नमाज के बाद बधाइयों का दौर चला, घरों पर बधाई देने वालों लोगों की सेवइयों से मनुहार की गई।
फरीदाबाद शहर में सुबह से ही मस्जिदों के सामने पुलिस तैनात कर दी गई। यहां नमाज पढ़ने आए लोगों से अपील कर पुलिस ने घर पर ही नमाज अता करने के लिए राजी किया। खुफिया विभाग रात को ही सक्रिय हो गया था। इसके साथ ही पुलिस ने मस्जिद के मौलानाओं से संपर्क बनाए रखा और भीड़ इकट्ठी ना करने को कहा। ओल्ड फरीदाबाद स्थित पुरानी जामा मस्जिद व तालाब पार्क के पास स्थित मस्जिद के सामने पुलिस की पीसीआर तैनात कर दी गई थी। मस्जिद से करीब दो सौ मीटर पहले ही पुलिस ने बेरिकेडिंग कर दी थी, ताकि लोगों को यहां से ही वापस कर दिया जा सके। सिकरोना स्थित पुरानी मस्जिद के पास भी पुलिस ने नाका लगा दिया और पुलिस बल तैनात कर दिया। हालांकि यहां बहुत ज्यादा भीड़ नही होती। शहर की सबसे बडी मस्जिदों में शामिल सेक्टर छह स्थित ईदगाह, बड़खल रोड स्थित दिल्ली मस्जिद, सेक्टर तीन स्थित मस्जिद व बल्लभगढ़ बड़ी मस्जिद के आसपास पुलिस की तैनाती ज्यादा रही। थाना प्रभारी अपनी पीसीआर पर इलाके में गश्त करते रहे। कई इलाकों में पुलिस ने मुनादी कराकर भी लोगों से घर में ही ईद मानने की अपील की।
-----
कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए हमारी तरफ से लोगों को पहले ही अपील की जा चुकी थी, कि वह घरों में रह इस पर्व को शांति व सादगी के साथ मनाएं और देश के हर व्यक्ति को महामारी से सुरक्षित रखने की फरीयाद करे।
मौलाना जमालुद्दीन, जिला अध्यक्ष जमीयत उलेमा, एवं इमाम जामा मस्जिद ऊंचा गांव
--
ईद-उल-फितर हमारा सबसे पवित्र पर्व है। लोगों से कहा है कि वे कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए अपने रब से सभी की बेहतरी की दुआ कंरे और हमें जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आना चाहिए।
डॉ. साबिर मलिक
--
महामारी के दौरा में हमें सबको साथ लेकर चलना चाहिए और जहां जिसको जैसी भी जरूरत हो उसकी मदद के लिए आगे आना चाहिए। यह वक्त सबको साथ लेकर चलने का हैं।
- अलाउद्दीन