बढ़ते मामलों को देखते हुए आपातकालीन विभाग में भी एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने की सुविधा शुरू की गई है
भारती दुबे
फरीदाबाद। जिले में कुत्ते के काटने के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। प्रशासन की ओर से किताबी कार्रवाई के अलावा धरातल पर कोई कार्य नहीं किया जा रहा है। यदि बीते वर्ष 2025 की बात की जाए, तो बीके अस्पताल में कुल 28478 मरीजों ने एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगवाए हैं। यह आकड़ा केवल बीके अस्पताल का है, इसके अलावा भी कई लोग जिले में बने स्वास्थ्य केंद्र, निजी अस्पताल व क्लीनिकों पर एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाते हैं।
इन मरीजों में महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे व युवा शामिल हैं। वर्ष 2024 में रेबीज मरीजों का आकड़ा 23215 था, जबकि 2023 में 21600 था। यानी 2024 से 2025 तक पांच हजार से अधिक मरीजों की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, 2023 से 2025 तक करीब सात हजार मरीजों में इजाफा हुआ है। बीके अस्पताल में पहले केवल सोमवार से शुक्रवार दोपहर दो बजे तक एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जाते थे, लेकिन बढ़ते मामलों के बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से आपातकालीन विभाग में भी एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने की सुविधा शुरू कर दी गई। इसके बाद से सोमवार से शुक्रवार दोपहर दो बजे तक इंजेक्शन रूम में यह सेवा उपलब्ध है।
प्रतिदिन पहुंच रहे सौ से अधिक मरीज
बीके अस्पताल में प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ता काटने पर घाव को तत्काल साबुन और पानी से अच्छी तरह धोना जरूरी है और इसके बाद बिना देर किए अस्पताल पहुंचकर इंजेक्शन लगवाना चाहिए। बीके अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन मात्र 100 रुपये में लगाया जाता है, जबकि निजी अस्पतालों में इस इंजेक्शन की कीमत करीब 400 रुपये है। कुत्ते के काटने के बाद मरीज को उसी दिन, तीसरे दिन, सातवें दिन और 28वें दिन इंजेक्शन लगवाना आवश्यक है।
पालतू जानवरों के साथ सावधानी बरतें
चिकित्सकों का कहना है कि लोग पालतू जानवरों के साथ सावधानी बरतें, खासतौर पर छोटे बच्चों को अकेले पालतू कुत्तों के पास न छोड़ें। उन्होंने बताया कि अस्पताल में कई मामलों में पालतू कुत्ते ही काट रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि या तो उनका व्यवहार सही से नियंत्रित नहीं हो रहा या फिर मालिकों की ओर से उनकी देखभाल में लापरवाही बरती जा रही है। चिकित्सकों का कहना है कि पालतू जानवरों को समय पर वैक्सीनेट कराना जरूरी है और किसी भी काटने की घटना के बाद तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
चिकित्सकों का कहना है कि कई बार एक ही इलाके से एक ही दिन में कई मरीज अस्पताल में पहुंचते हैं। इससे हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। लोगों का आरोप है कि नगर निगम इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि लावारिस कुत्तों पर नियंत्रण के लिए जल्द कार्रवाई की जाए, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
2025
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