बल्लभगढ़। सेक्टर-3 स्थित प्रथम रेफरल यूनिट (एफआरयू) में अगर किसी कामकाजी मरीज को उपचार करवाना है तो छुट्टी लेनी पड़ती है, क्योंकि स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर देरी से पहुंचते हैं और जल्दी चले जाते हैं। इस कारण मरीज का पूरा दिन अस्पताल में उपचार के लिए लग जाता है। केंद्र पर बाल रोग विशेषज्ञ, महिला रोग विशेषज्ञ और दांत रोग विशेषज्ञ बैठते हैं। लेकिन, डॉक्टर अक्सर समय पर नहीं आते हैं। इससे मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
अमर उजाला की टीम ने शनिवार सुबह सेक्टर-3 स्थित स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर हड़ताल की। इस दौरान देखा कि अस्पताल का मुख्य द्वार 9:05 बजे खोला गया। जबकि नियमानुसार अस्पताल का गेट समय से करीब आधे से 1 घंटे पहले खुलना चाहिए, ताकि सफाई कर्मचारी सफाई कर सकें।
स्वास्थ्य केंद्र पर सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाएं उपचार के लिए आती हैं। शनिवार सुबह करीब 8:30 बजे से ही महिलाओं का जमावड़ा अस्पताल के मुख्य द्वार के बाहर लगने लगा था, लेकिन मुख्य द्वार बंद था। महिलाओं ने बताया कि काफी समय से द्वार के खुलने का इंतजार कर रही हैं, लेकिन कोई भी कर्मचारी व अधिकारी द्वार खोलने के लिए नहीं आया है। सुबह 9:05 बजे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के द्वारा मुख्य द्वार खोला गया। इसके बाद रजिस्ट्रेशन काउंटर पर लाइन में लगी।
सुबह 9:15 बजे से शुरू हुआ रजिस्ट्रेशन
मुख्य द्वार खोलने के बाद सभी महिलाएं और मरीज उपचार करवाने के लिए रजिस्ट्रेशन काउंटर पर पर्ची बनवाने के लिए लाइन लग गए। काउंटर का कंप्यूटर को ओपन होने में करीब 10 मिनट का समय लगा। इसके बाद 9:15 बजे महिलाओं की पर्ची बनाई गई।
9: 40 बजे पहुंची महिला डॉक्टर
जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्र का समय सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक है। लेकिन, सेक्टर-3 स्थित स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर करीब आधे से 1 घंटे की देरी से आते हैं। सेक्टर-2 निवासी राधा ने बताया कि वह शनिवार सुबह 8:00 बजे स्वास्थ्य केंद्र के बाहर आकर लाइन में लग गई थी। उनको लगा कि 9:15 बजे तक उनका उपचार हो जाएगा। इस बारे में जब मौजूद स्टाफ से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि शनिवार को अष्टमी की पूजा होने की वजह से सभी स्टाफ देरी से आ रहे हैं। वैसे तो सभी समय पर आते हैं। 9: 40 पर डॉक्टर आने के बाद सभी महिलाओं का उपचार शुरू किया गया। सुबह 9:40 बजे तक बाल रोग विशेषज्ञ अपने कमरे में नहीं आए थे।
एक निजी कंपनी में कार्य करती हूं। अंतरा इंजेक्शन लगवाने के लिए स्वास्थ्य केंद्र पर आना पड़ा। मुझे लगा कि 10:00 बजे तक कार्यालय पहुंच जाऊंगी, लेकिन 8:00 बजे आने के बाद भी उनका उपचार 10:00 बजे हुआ।
- साहिबा, सेक्टर-2
डॉक्टरों के लेट आने के कारण मरीजों को काफी परेशानी होती है। क्योंकि, डॉक्टर द्वारा खून की जांच लिखी जाती है और लैब 12:00 बजे बंद कर दी जाती है। इसलिए उनको अगले दिन खून की जांच करवाने आना पड़ता है।
- गौरी, सेक्टर-3
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अगर स्वास्थ्य केंद्र का गेट समय पर नहीं खुलता है और डॉक्टर भी देरी से पहुंचते हैं तो स्वास्थ्य केंद्र के इंचार्ज से लिखित में जवाब मांगेंगे। - डॉ. विनय गुप्ता, सीएमओ, बी के अस्पताल, फरीदाबाद