पिछले साल 36वीं रही थी रैंक, इस बार 34वें स्थान पर रहा जिला, डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन पर अभी काम करने की जरूरत
सफाई कर्मचारियों की कमी के चलते व कचरा संग्रहण करने वाली एजेंसी का चयन समय पर ना हो पाना रहा रैंकिंग में कम सुधार का कारण
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। स्वच्छ भारत मिशन के तहत किए गए स्वच्छता सर्वेक्षण-2024-25 में 10 लाख तक की आबादी वाले शहरों में फरीदाबाद ने इस बार देशभर में 34वीं रैंक हासिल की है। पिछले साल की तुलना में फरीदाबाद ने 2 पायदान की छलांग लगाई है। 2023-24 में शहर की रैंकिंग 36 थी। हालांकि गार्बेज फ्री सिटी (जीएफसी) रेटिंग में फरीदाबाद की स्थिति निराशाजनक रही। शहर को इस बार भी जीरो स्टार मिला है। यानी कूड़ा प्रबंधन में अभी काफी खामियां बरकरार हैं।
सफल शहरों से क्या सीख सकता है फरीदाबाद
10 लाख तक की आबादी वाले इलाकों में अहमदाबाद ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। भोपाल दूसरे और लखनऊ तीसरे स्थान पर रहा। इन शहरों में कचरे के स्रोत पर ही गीले-सूखे कूड़े को अलग कर दिया जाता है । फरीदाबाद को भी यह तरीका अपनाना चाहिए। अच्छी रैंकिग वाले शहरों में डोर-टू-डोर कूड़े के संग्रहण की व्यवस्था काफी अच्छी है, इस पर निगम को काम करने की जरूरत है। वहीं टॉप रैंकिग में रहने वाले शहरों में कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण आधुनिक तरीके से किया जा रहा है, फरीदाबाद प्रशासन को इससे भी सुधार करने की जरूरत है। वहीं प्रशासन के साथ लोगों को भी इसके लिए आगे आना होगा। लोगों को प्रशासन के अभियान में भाग लेकर सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।
जीएफसी में शहर को शून्य रेटिंग, निगम को होना होगा गंभीर
जीएफसी में शून्य रेटिंग मिलना एक गंभीर मामला है। अधिकारी शहर को साफ रखने के लिए लगातार काम कर रहे हैं लेकिन कचरा मुक्त शहर बनाने में एक प्रतिशत भी सफलता ना मिलना सोचने की बात है। समय से कूड़ा उठाव करना व एजेंसी को सख्त निर्देश देकर काम करवाने की जरूरत है। इसके साथ ही निगरानी के लिए एक्टिव टीम बनानी बहुत जरूरी है।
नगर निगम फरीदाबाद ने इस साल कई कदम उठाए
ओपन डंपिंग पर रोक
बाजारों में सफाई अभियान
वॉल पेंटिंग और जनजागरूकता अभियान
डोर-टू-डोर कलेक्शन को बढ़ावा
बजट आवंटन और खर्च
नगर निगम ने पिछले साल सफाई पर 50 करोड़ से अधिक खर्च किए थे लेकिन कर्मचारी और संसाधनों की कमी के कारण कई योजनाएं अधूरी रह गई। अधिकारियों को इस मामले को गंभीरता से लेकर काम करने की जरूरत है।
कर्मचारियों व उपकरणों की समस्या
फरीदाबाद में 6 हजार से अधिक सफाई कर्मचारियों की जरूरत है, लेकिन मौजूदा संख्या 4 हजार से भी कम है। वहीं कई सफाई कर्मचारियों को अधिकारियों के घरों में लगा दिया गया है, इससे शहर में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या और कम हो गई है। वहीं जिले के कई वार्डों में सफाई के लिए पर्याप्त मशीनें और वाहन नहीं हैं। अधिकारियों को इसके लिए जमीनी स्तर पर जाकर जांच करनी चाहिए।
हॉटस्पॉट - कचरा प्वाइंट
फरीदाबाद में सेक्टर-10, एनआईटी, बल्लभगढ़ बाजार, ओल्ड फरीदाबाद जैसे इलाकों में कचरा प्वाइंट अब भी खुले में हैं। बारिश में जलभराव और सड़कों पर कचरा तैरना आम बात है।
तकनीक का उपयोग सीमित
स्वच्छता विशेषज्ञों का मानना है कि फरीदाबाद में तकनीक का उपयोग सीमित है। अभी स्मार्ट डस्टबिन, कचरा ट्रैकिंग एप जैसी व्यवस्थाएं नहीं अपनाई गईं है। पर्यावरणविदों का कहना है कि कचरे का वैज्ञानिक निपटान नहीं हो रहा। बायोमाइनिंग की रफ्तार बेहद धीमी है।
जनसहयोग से स्मार्ट सिटी बनेगी क्लीन सिटी
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि इस बार जनसहभागिता बढ़ी है और रैंकिंग में सुधार भी हुआ है लेकिन जीएफसी में सुधार के लिए बड़े स्तर पर काम करने की योजना है। गीले और सूखे कूड़े को स्रोत पर ही अलग अलग करवाने के लिए भी अभियान चलाया जाएगा।
पीपीपी मॉडल की स्थिति
निगम की तरफ से कचरा उठाने वाली एजेंसी को कई माह पहले ब्लैक लिस्ट कर दिया गया था। इसके बाद सरकार की तरफ से पांच साल के लिए टेंडर निकालने के आदेश आ गए। इसमें करीब 200 करोड़ रुपये खर्च होंगे लेकिन अभी तक चंडीगढ़ से इस बजट को मंजूरी नहीं मिल सकी है। वहीं कचरा पाइंट से कचरा उठाने वाली कंपनी के काम से भी अधिकारी संतुष्ट नहीं है। इसी माह नए एजेंसी का चयन कर काम में सुधार करने की योजना है।
निगम कमिश्नर ने उठाए हैं कई सकारात्मक कदम
निगम के कमिश्नर धीरेंद्र के आदेश पर कचरा उठाने वाली गाड़ियों की संख्या दो गुना कर दी गई है। वहीं उनके निर्देश के बाद जलभराव व सफाई के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। आने वाले समय में इन नीतियों का फर्क जमीनी स्तर पर भी देखने को मिलेगा।
फरीदाबाद के लिए चुनौतियां
बंधवाड़ी लैंडफिल साइट की क्षमता खत्म हो चुकी है।
सेक्टर-वार कचरे का पृथक्करण पूरी तरह लागू नहीं हुआ।
निर्माण मलबे का प्रबंधन न के बराबर है।