फरीदाबाद। एनआईटी-तीन स्थित डीएवी शताब्दी महाविद्यालय में आर्य समाज के 150वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन वैदिक दर्शन पर मंथन हुआ। इस दौरान स्वामी दयानंद सरस्वती के वैदिक दर्शन विषय पर देश-विदेश से जुड़े विद्वानों और शोधार्थियों ने विस्तार से चर्चा की।
मुख्य अतिथि सत्यपाल आर्य ने कहा कि संन्यासी बनने के लिए केवल भगवा धारण करना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि वेद ज्ञान और सदाचार आवश्यक है। उन्होंने स्वामी दयानंद के समानता भाव, स्त्री शिक्षा, जाति प्रथा उन्मूलन और शिक्षा के मौलिक अधिकार की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर वेद प्रकाश ने भ्रम महाकाव्य में वर्णित जीवन संबंधी भ्रमों का विश्लेषण प्रस्तुत किया, जबकि एमडीयू रोहतक के प्रोफेसर आचार्य बलवीर ने अधिकाधिक समय वेद अध्ययन में लगाने का आह्वान किया। संगोष्ठी में 22 राज्यों से 130 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया। संवाद