निर्माण गतिविधियों से शहर में पीएम-10 के कुल उत्सर्जन में 7 प्रतिशत की हिस्सेदारी
राहुल राज
फरीदाबाद। शहर में निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाला मलबा कहां डालें, इसका जवाब जिम्मेदार विभाग के पास भी नहीं है। शहर में हरियाली विकसित करने पर 150 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन ग्रीन बेल्ट में मलबे के ढेर लगे हुए हैं। दूसरी ओर, मलबे के निस्तारण की व्यवस्था भी ठप पड़ी है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के हालिया निर्देशों के तहत 200 वर्ग मीटर या इससे बड़े प्लॉट पर निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे का निर्धारित केंद्र पर निस्तारण कराना अनिवार्य है। इसकी रसीद के बिना भवन का पूर्णता या अधिभोग प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा। इसके बावजूद शहर में एक भी सीएंडडी वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट चालू नहीं है। वहीं, द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टिट्यूट (टेरी) के अनुसार, निर्माण गतिविधियों से शहर में पीएम-10 के कुल उत्सर्जन में करीब सात प्रतिशत की हिस्सेदारी है।
रोजा 300 टन निकल रहा मलबा
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की निगरानी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, फरीदाबाद नगर निगम क्षेत्र में प्रतिदिन करीब 300 टन मलबा निकलता है। रिपोर्ट में इसके संग्रह, भंडारण और प्रसंस्करण की व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई है। इसके बावजूद शहर में मलबा प्रसंस्करण की व्यवस्था वर्ष 2025 से बंद पड़ी है। नई आवासीय परियोजनाओं, सड़कों, फ्लाईओवरों, औद्योगिक इकाइयों और पुराने भवनों के पुनर्निर्माण से निकलने वाले मलबे में ईंट, कंक्रीट, सीमेंट, प्लास्टर, टाइल और सरिया शामिल हैं। निस्तारण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से यह मलबा सड़कों के किनारे खाली जमीन और ग्रीन बेल्ट में डाला जा रहा है।
ग्रीन बेल्ट में डाला जा रहा मलबा
शहर में हरियाली बढ़ाने के लिए 150 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। वहीं, दूसरी ओर ग्रीन बेल्ट में मलबा डालकर हरित क्षेत्रों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। सेक्टर-11 और 12 के मुख्य मार्ग, सूरजकुंड रोड, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के आसपास और दिल्ली-मथुरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर बाटा फ्लाईओवर के पास ग्रीन बेल्ट में ईंट, कंक्रीट, टाइल और मिट्टी के ढेर पड़े हैं। कई जगह मलबा छोटे-बड़े ढेरों के रूप में फैला हुआ है। इससे पौधरोपण के लिए उपलब्ध जमीन कम हो रही है और हरित पट्टियों का स्वरूप बिगड़ रहा है।
एफएमडीए की करीब 97 करोड़ रुपये की योजना के तहत प्रमुख सड़कों और ग्रीन कॉरिडोर के किनारे हरियाली विकसित करने, पौधे लगाने और ग्रीन बेल्ट को व्यवस्थित करने के कार्य किए जा रहे हैं। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के किनारे मिनी जंगल विकसित करने और दिल्ली-मथुरा रोड पर सराय से सीकरी तक हरियाली बढ़ाने की परियोजनाएं भी शामिल हैं। वहीं, नगर निगम करीब 50 करोड़ रुपये खर्च कर पार्कों का पुनर्विकास और हरियाली बढ़ाने के कार्य करा रहा है।
डेढ़ साल से बंद पड़ा है सीएंडडी प्लांट
नगर निगम ने रिवाजपुर में सीएंडडी प्लांट संचालित करने वाली एजेंसी का अनुबंध ठीक से काम नहीं करने के कारण चार मई 2025 को समाप्त कर दिया गया था। नए प्लांट के शुरू होने तक मलबे के अस्थायी संग्रह के लिए पांच स्थान चिह्नित किए गए हैं। इनमें बड़खल-एनआईटी, ओल्ड फरीदाबाद, तिगांव, बल्लभगढ़ और मिर्जापुर का सिंही रकबा शामिल है।
निर्माण गतिविधियों से रोज 9.58 टन पीएम-10 का उत्सर्जन
शहर में निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियां वायु प्रदूषण बढ़ा रही हैं। द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टिट्यूट (टेरी) के रिपोर्ट के अनुसार निर्माण कार्यों से प्रतिदिन करीब 9.58 टन पीएम-10 और 1.64 टन किलोग्राम पीएम-2.5 का उत्सर्जन होता है। शहर में पीएम-10 के कुल उत्सर्जन में निर्माण क्षेत्र की सीधी हिस्सेदारी करीब सात प्रतिशत है।