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अरावली में डंपिंग ग्राउंड बनाने को काटने पड़ेंगे 20 हजार पेड़

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फरीदाबाद। अरावली की पहाड़ियों में बसे गांव पाली में प्रस्तावित डंपिंग ग्राउंड को बनाने के लिए बीस हजार पेड़ों को काटना पड़ेगा। इसके विरोध में सेव फरीदाबाद के पदाधिकारियों ने नगर निगम अधिकारियों से मुलाकात कर आपत्ति दर्ज कराई। पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रही सेव फरीदाबाद संस्था के साथ स्थानीय ग्रामीण भी थे। ग्रामीणों को भी इस बात की चिंता है कि पाली में डंपिंग ग्राउंड बनने के बाद बंधवाड़ी की तरह यहां भी भूजल स्तर दूषित हो जाएगा और पाली सहित आसपास के गांवों में लोगों को बीमारियां घेर लेंगी।
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सेव अरावली संस्था के संस्थापक जितेंद्र भड़ाना ने बताया कि अरावली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का फेफड़ा कहा जाता है। यदि अरावली उजड़ गई तो एनसीआर में सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा। निगम अधिकारियों को दिए गए आपत्ति पत्र में बताया गया है कि अरावली में बसे पाली गांव में प्रस्तावित डंपिंग ग्राउंड को बनाने में करीब 20 हजार पेड़ों की बलि देनी होगी।
पर्यावरण को होगा नुकसान, उजड़ेगा जंगली जानवरों का घर
लगातार बढ़ते प्रदूषण में 20 हजार पेड़ों को काटने से पर्यावरण को बड़ा नुकसान पहुंचेगा और कचरा डलने से भूजल भी दूषित हो जाएगा। इतना ही नहीं इस क्षेत्र में तेंदुआ, लकड़बग्घा, हिरन, नील गाय, सियार आदि जंगली जानवरों के अलावा पक्षियों की कई तरह की प्रजातियां रहती हैं। इससे उनका घर भी उजड़ जाएगा।
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अदालत में विचाराधीन है मामला
उन्होंने बताया कि नगर निगम पाली की 30 एकड़ जमीन पर डंपिंग ग्राउंड बनाने की तैयारी में है। इसके विरोध में उनकी टीम के साथ ग्रामीणों ने नगर निगम के वरिष्ठ वास्तुकार बीएस ढिल्लो सहित अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर अपना विरोध दर्ज कराया है। भड़ाना के अनुसार, जिस जमीन पर नगर निगम डंपिंग ग्राउंड बनाना चाहता है, उसका मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में विचाराधीन है। साथ ही निगम ने वह जमीन जबरन कब्जाई थी, जिसकी मलकियत का मामला भी अदालत में विचाराधीन है। ऐसे में वहां किसी भी तरह की गतिविधि नहीं की जा सकती है।
10 किलोमीटर का क्षेत्र होगा प्रभावित
नगर निगम बंधवाड़ी स्थित ठोस कचरा निस्तारण प्लांट में कचरे से बिजली बनाने का काम शुरू होने के बाद निकलने वाली राख को वहां डालने की बात कह रहा है। ग्रामीण इसके लिए तैयार नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक बार राख डलनी शुरू हुई तो धीरे-धीरे वहां कूड़ा भी डलने लगेगा। केवल पाली गांव ही नहीं उसके आसपास के 10 किलोमीटर का क्षेत्र इससे प्रभावित होगा। इतने बड़े क्षेत्र में करीब 20 गांव व 10 रिहायशी कालोनियां आती हैं और करीब तीन लाख लोग रहते हैं। भड़ाना ने 44 बिंदुओं का आपत्ति पत्र निगम अधिकारियों को सौंपा है।
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