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Faridabad News: विधायक की फर्जी मोहर से आधार अपडेट कराने के आरोप में सीएससी संचालक धरा

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पर्वतीय कॉलोनी में घर में बनी दुकान में तैयार करवाई थी मोहर, तीन दिन के रिमांड पर लिया
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नंबर गेम- 1000 रुपये प्रति दस्तावेज लेने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। पर्वतीय कॉलोनी में विधायक की फर्जी मोहर बनाकर आधार कार्ड अपडेट से जुड़े दस्तावेजों पर इस्तेमाल करने के आरोप में सारन थाना ने मंगलवार को कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) संचालक सौरभ को गिरफ्तार किया। आरोपी करीब पांच साल से सीएससी सेंटर चला रहा था और ग्राहकों से दस्तावेजों पर सत्यापन कराने के नाम पर रकम लेता था। पुलिस प्रवक्ता यशपाल का कहना है कि सारन थाना ने आरोपी को अदालत में पेश कर तीन दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है।

आरोपी ने एनआईटी विधायक सतीश कुमार फागना के नाम की फर्जी मोहर बनवा रखी थी। इसी मोहर का इस्तेमाल आधार कार्ड में पता और अन्य जानकारियों में संशोधन से जुड़े दस्तावेजों पर किया जाता था। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी ने अपने घर में बनी छोटी दुकान में ही मोहर तैयार कराई थी।
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पुलिस के मुताबिक आरोपी ग्राहकों के आधार कार्ड से जुड़े दस्तावेजों पर विधायक के नाम की फर्जी मोहर लगाता था और इसके लिए उनसे एक हजार रुपये तक वसूलता था। प्रारंभिक जांच में करीब 15 से 20 आवेदनों पर फर्जी मोहर का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और फर्जी मोहर का इस्तेमाल कितने दस्तावेजों पर किया गया, इसकी पुष्टि की जा रही है।

विधायक कार्यालय पहुंचने पर हुआ खुलासा
फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ, जब आरोपी कुछ दस्तावेज लेकर डबुआ कॉलोनी स्थित विधायक कार्यालय पहुंचा। उसने कार्यालय प्रभारी सत्यप्रकाश को दस्तावेज दिखाते हुए बताया कि विधायक के हस्ताक्षर होने के बावजूद आधार कार्ड में संशोधन नहीं हो रहा है। दस्तावेज देखकर कार्यालय प्रभारी को संदेह हुआ। विधायक से जानकारी लेने पर पता चला कि उन्होंने ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। इसके बाद पुलिस को शिकायत दी गई।
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पांच साल से चला रहा था सीएससी सेंटर
आरोपी पर्वतीय कॉलोनी में करीब पांच साल से सीएससी सेंटर चला रहा था। यहां आधार कार्ड में पता व अन्य जानकारियों में संशोधन के अलावा दूसरे सरकारी कार्य भी किए जाते थे। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपी ने कितने लोगों के दस्तावेजों पर फर्जी मोहर लगाई और उससे किन-किन लोगों को लाभ पहुंचाया गया।
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