पुलिस ने जांच के दौरान कबूलपुर बांगर निवासी जगविंदर को 18 अप्रैल को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में सामने आया कि जब बेटे ब्रह्मजीत ने हत्या की बात अपने पिता को बताई, तो जगविंदर ने पुलिस को सूचित करने के बजाय बेटे को बचाने का प्रयास किया। उसने बेटे को पांच हजार रुपये दिए और मोटरसाइकिल पर छोड़कर अपनी बहन के घर भेज दिया, जहां से उसे हरिद्वार भागने के निर्देश दिए गए थे। सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने भी अदालत में माना कि हत्या में पिता का कोई हाथ नहीं है।
शादीशुदा था बेटा, महिला लगातार ब्लैकमेल कर रही थी
पुलिस जांच और मुख्य आरोपी ब्रह्मजीत के कबूलनामे के अनुसार, मृतक महिला (45) उसकी उम्र से करीब 23 साल बड़ी थी और दोनों के बीच संबंध थे। ब्रह्मजीत शादीशुदा था और महिला उसे लगातार ब्लैकमेल कर रही थी। इसी विवाद के चलते ब्रह्मजीत महिला को बहाने से खेतों में ले गया, जहां तीखी बहस के बाद उसने पैर से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी और शव को नग्न अवस्था में नाले में फेंक दिया ताकि पहचान छिपाई जा सके। घटना का खुलासा तब हुआ जब इलाके के एक लावारिस कुत्ते की वजह से नाले में तैरते शव की तरफ लोगों का ध्यान गया। 17 अप्रैल को थाना सेक्टर-8 क्षेत्र के अंतर्गत कबूलपुर गांव के पास एक गंदे नाले से महिला का क्षत-विक्षत शव बरामद किया गया था। मृतका की पहचान हुई, जो 15 अप्रैल को घर से बिजली का बिल जमा कराने निकली थी। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने शुरू में बीएनएस की धारा 103(1) (हत्या) और 238ए के तहत केस दर्ज किया था।
एक लाख के मुचलके पर नियमित जमानत याचिका मंजूर
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि चूंकि आरोपी जगविंदर का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और मामले का ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लग सकता है, इसलिए उसे जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर अंतिम टिप्पणी किए बिना जगविंदर की जमानत याचिका मंजूर कर ली। अदालत ने आदेश दिया कि आरोपी को ड्यूटी मजिस्ट्रेट की संतुष्टि के अनुसार एक लाख रुपये का जमानत बांड और इतनी ही राशि का मुचलका जमा करने पर तुरंत नियमित जमानत पर रिहा किया जाए।