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Faridabad News: सिर में 25 टांके आने पर भी हल्की धारा में दर्ज किया केस, कोर्ट ने पुलिस को फटकारा

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कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद जोड़ी हत्या के प्रयास की धारा
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कैलाश गठवाल
फरीदाबाद। घर में घुसकर मारपीट के मामले में दो युवकों के सिर में 22 और 25 टांके आने के बावजूद पुलिस ने केस में केवल साधारण मारपीट की धारा जोड़कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पीड़ित की शिकायत के मुताबिक, उस पर करीब 15 लोगों ने हमला किया था, जिसमें से 12 के नाम उसने पुलिस को दिए। इसके बावजूद पुलिस ने केवल तीन लोगों को ही गिरफ्तार किया और धारा हल्की होने के कारण तीनों को मात्र ढाई महीने में ही जमानत भी मिल गई। केस को इतने हल्के तरीके से अदालत के सामने रखने पर अदालत ने पुलिस को फटकार लगाई। अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने केस में हत्या के प्रयास की धारा जोड़ी। अदालत ने पुलिस आयुक्त को निर्देश दिए कि केस संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
मामला ओल्ड फरीदाबाद थाने का है। 26 जून 2023 को चंद्रकांता नाम की महिला ने शिकायत दी कि उसका भाई अमर उर्फ चिप्पा और दोस्त सपोला रात को उसके घर आए थे। सुबह करीब नौ बजे कुछ युवकों का झुंड अचानक से घर में आ गया और अमर उर्फ चिप्पा व उसके साथ बैठे बंटी पर तलवार, लोहे की रॉड, डंडे और फावड़े से हमला कर दिया। आरोपियों में साकिर, शाबिर, जावेद, पउवा, जमील, सद्दाम, इकबाल, चुल्ला खान, अरशद खान, अनवर, दानिश व रफीक सहित करीब 15 लोग शामिल थे। मेडिकल के दौरान अमर उर्फ चिप्पा के सिर में 22 और बंटी के सिर में 25 टांके आए थे। पुलिस ने घर में घुसकर मारपीट व जान से मारने की धमकी देने सहित एससी- एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर आबिद उर्फ पव्वा, इरफान और इरशाद को गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर जेल भेज दिया।
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ऐसे जुड़ी हत्या के प्रयास की धारा

केस में शिकायत के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट लगाया गया था। इसकी जांच एसीपी ओल्ड फरीदाबाद विष्णु प्रसाद कर रहे हैं। झगड़े सहित अन्य धाराओं की जांच एएसआई सबर सिंह के पास है। 11 सितंबर को आरोपियों के अधिवक्ता ने जमानत की अर्जी लगाई, जिसे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमृत सिंह की अदालत ने ये कहते हुए नामंजूर कर दिया कि पुलिस ने शिकायत के मुताबिक धारा नहीं लगाई है। केस को हल्का कर दिया गया है। अदालत ने इसके लिए जांच अधिकारी एएसआई सबर सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। इसके बाद पुलिस ने केस में धारा 307 (हत्या के प्रयास ) की धारा लगाई।
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पुलिस चूक के कारण आरोपियों को मिला लाभ
हत्या के प्रयास की धारा जोड़ने के बाद भी आरोपियों को जमानत मिल गई। दरअसल नियमानुसार सात साल तक सजा के मामलों की धारा में सीआरपीसी धारा 176 (2) के तहत पुलिस को 60 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होती है। पुलिस ने केस में 69 दिनों तक चार्जशीट फाइल नहीं की। आरोपियों के अधिवक्ता ने इसी आधार पर जमानत याचिका लगाई, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। साथ ही पुलिस को फटकार लगाते हुए लिखा कि पुलिस के जिन अधिकारियों की जांच में चूक और समय पर चार्जशीट दाखिल न करने के कारण आरोपियों को लाभ मिला, उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
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