मिलावटखोरों पर त्वरित कार्रवाई हो सकेगी, स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए नगर निगम से उपयुक्त जगह मांगी,
मनोज धर द्विवेदी
फरीदाबाद। स्मार्ट सिटी फरीदाबाद में सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों पर त्वरित कार्रवाई हो सकेगी। इसके लिए जिला स्तर पर फूड टेस्टिंग लैब बनाने की तैयारी चल रही है। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए नगर निगम से उपयुक्त जगह मांगी है जहां पर मॉडर्न लैब बनाई जा सके। इसमें आम लोग खाने-पीने के सामान की जांच करा सकेंगे।
जिला खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से मिलावटखोरों पर समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। इसके लिए दही, दूध, मावा, पनीर आदि खाद्य पदार्थों का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जाता है। सैंपल फेल होने पर विभाग की ओर से कानूनी कार्रवाई भी की जाती है। हालांकि जिला स्तर पर जांच के लिए लैब उपलब्ध नहीं होने पर सभी प्रकार के सैंपल जांच के लिए पंचकूला भेजे जाते हैं। ऐसे में कई बार चार से छह माह तक रिपोर्ट आने में लग जाते हैं तक तक लोग सामान का प्रयोग कर चुके होते हैं।
दूसरी ओर आम लोगों के लिए भी ऐसा कोई इंतजाम नहीं है, जहां पर लोग सामान की जांच करा सकें। ऐेसे में लंबे समय से जिले में फूड टेस्टिंग लैब की मांग उठती रही है। पिछले विधानसभा सत्र में यह मामला उठा था। इस पर प्रदेश सरकार ने जिला स्तर पर मिनी लैब बनाने की बात कही थी। अब इसे लेकर काम शुरू हो गया है। जिला खाद्य सुरक्षा विभाग लैब बनाने के लिए जमीन की तलाश शुरू कर दी है जिससे सभी सुविधाओं से लैस एक मॉडर्न फूड टेस्टिंग लैब बनाई जा सके। इसके लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने नगर निगम को पत्र लिखकर जगह की मांग की है। इसके लिए विभाग को कम से कम दो-तीन कमरों की जरूरत है। नगर निगम के कार्यकारी अभियंता नितिन कादियान ने बताया कि इस बारे में विभाग का एक पत्र मिला है। इसमें लैब बनाने के लिए जमीन की मांग की गई है। इसके लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
कम पैसों में हो सकेगी जांच
खाद्य सुरक्षा विभाग के पृथ्वी सिंह ने बताया कि जिला स्तर पर एक फूड टेस्टिंग लैब बनाने की योजना है। पहले चरण में पांच जिलों में इसे बनाया जाना है, इसमें फरीदाबाद भी शामिल है। लैब में आम लोग कम पैसे में सामान की जांच करा सकेंगे। कुछ सामान की जांच रिपोर्ट एक-दो घंटे में मिल जाएगी। अधिकारी ने बताया कि इससे आम लोगों को राहत मिलेगी, वह खुद सामान की जांच करा सकेंगे। जांच का रेट काफी कम रखा जाएगा।
28 में से पांच सैंपल फेल
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, जनवरी से मार्च तक करीब 28 विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों का सैंपल लिया गया था। इसमें पांच के सैंपल फेल पाए गए हैं। इसमें दूध के सामान, कुट्टू का आटा व अन्य खाद्य पदार्थ हैं। लोगों का कहना है कि मिलावट के सबसे अधिक मामले त्योहार के समय पर आते हैं। ऐसे में इस दौरान लिए गए सैंपल की रिपोर्ट काफी देर में आती है। यदि जिला स्तर पर लैब होगी तो दुग्ध उत्पादों की लोग खुद भी जांच करा सकेंगे। ऐसे में मिलावटखोरों पर त्वरित कार्रवाई हो सकेगी।